केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर जमकर पलटवार किया है. उन्होंने राहुल गांधी के रवैये को बेहद बचकाना बताते हुए कांग्रेस पर संविधान के हर पहलू को ध्वस्त करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आरोप बेबुनियाद हैं. चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष रहा है. ईसी ने हमेशा ईमानदारी से काम किया है. गोयल ने कहा कि कांग्रेस को अपना पुराना रिकॉर्ड याद रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने हमेशा चुनाव आयोग को स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम करने की पैरवी की है.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया कि मोदी सरकार ने किसी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक पद नहीं दिया, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को सांसद और मंत्री बनाया गया. पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि शेषन का नाम निष्पक्षता के लिए जाना जाता था, लेकिन कांग्रेस ने बाद में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा.
पीयूष गोयल ने क्या-क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने काम को, अपने ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज करती है… पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र तरीके से देशहित और जनहित में काम करने के लिए पूरी तरह से स्वायत्तता दी है… चुनाव आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक लाभ देने का प्रयास नहीं किया गया… उन्हें ईमानदारी से काम करने दिया गया.’
पीयूष गोयल ने आगे कहा, ‘राहुल गांधी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो एक चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पार्टी टिकट पर उम्मीदवार बनाया गया, एक को यूनियन कैबिनेट में लिया गया, दो चीफ इलेक्शन कमिश्नरों को गवर्नर बनाया गया, और एक बार चीफ इलेक्शन कमिश्नर के यह कहने पर कि उनके नीचे काम करने वाला इलेक्शन कमिश्नर कांग्रेस के एजेंट की तरह काम कर रहा है, उसे निकालने से इनकार कर दिया गया. ऐसा पक्षपात हमने शायद ही किसी सरकार में देखा होगा.’
कांग्रेस पर लगाए ये आरोप
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘चीफ इलेक्शन कमिश्नर टीएन शेषन जी की ईमानदारी का कांग्रेस बड़ा गुणगान करती थी… लेकिन 1999 में उन्हें, आडवाणी जी के सामने कांग्रेस के टिकट पर खड़ा होने का मौका दिया गया… क्या यह उन्हें रिवार्ड करने का काम नहीं था? एमएस गिल 1996 से 2001 तक चीफ इलेक्शन कमिश्नर थे… 2000 में सिटिंग चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पद्म विभूषण से नवाजा गया.. क्या यह उनकी चापलूसी और कारनामों को रिवार्ड देना नहीं था?’
पीयूष गोयल ने कहा, ‘रिटायरमेंट के 3 साल बाद एमएस गिल कांग्रेस ज्वॉइन करते हैं, 2004 में राज्यसभा में आते हैं, 2008 में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में मिनिस्टर बनाया जाता है…इससे ज्यादा आपको क्या सबूत चाहिए कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग के ऑफिस को कितने निचले स्तर पर गिरा दिया और अधिकारियों का कैसे दुरुपयोग किया.’
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘टीकाराम मीणा केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे… एक साल बाद उन्हें कांग्रेस की राजस्थान मेनिफेस्टो टीम में ले लिया गया… मई 2026 में रतन यू केलकर केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे… चुनाव के तुरंत बाद वर्तमान मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने उन्हें अपना चीफ सेक्रेटरी घोषित कर दिया… क्या यह राजनीतिक रोटियां सेंकना नहीं है कि आप चुनाव में मदद कीजिए और हम आपको पद पर नियुक्त कर देंगे.’
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘पहले इलेक्शन कमिश्नर कैसे चुना जाता था? सरकार चुनती थी… जिसे चाहा, उसे चीफ बना दिया… यह मोदी जी की सरकार है, जिसने 2023 में कानूनी प्रावधान किया… इसके तहत नेता प्रतिपक्ष को सिलेक्शन कमेटी का सदस्य बनाया गया… अब पीएम के साथ नेता प्रतिपक्ष भी तय करते हैं कि कौन बनेगा चीफ इलेक्शन कमिश्नर.’
SIR पर पीयूष गोयल ने कहा, ‘कांग्रेस के कई नेता राहुल गांधी के खिलाफ अपनी बात रख रहे हैं… शशि थरूर जी ने खुद कहा कि SIR के कारण केरल में कांग्रेस चुनाव जीती है… रमेश चेन्नीथला जी ने खुद कहा कि SIR के कारण केरल में कांग्रेस चुनाव जीती है… केरल के मुख्यमंत्री जी ने भी SIR की तारीफ की है… अधीर रंजन चौधरी जी ने भी चुनाव आयोग की तारीफ की है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने अच्छे से चुनाव करवाया है… अब उनकी खुद की पार्टी बेबुनियाद और झूठे वोट चोरी के दावे ला रही है.’
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