कमल वर्मा, ग्वालियर। शहर की राज्य साइबर सेल पुलिस ने एक ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर लाखों की ठगी कर रहा था। पुलिस ने उत्तर प्रदेश से गिरोह के मास्टरमाइंड सौरभ वर्मा और उसके साथी राजेश कुमार को गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

ग्वालियर के शिवपुरी लिंक रोड निवासी हर्षित द्विवेदी जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंडीनियर है, छुट्टी पर घर आए हुए थे। इसी दौरान ठगों ने उन्हें अपना शिकार बनाया। आरोपियों ने खुद को नारकोटिक्स  अफसर बताकर हर्षित को फोन किया और डराया कि उनके नाम से आए पार्सल में ड्रग्स मिला है। जिसके बाद आरोपियों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगों ने हर्षित को घंटों वीडियो कॉल पर नजरबंद यानि डिजिटल अरेस्ट रखा।

30 लाख से ज्यादा की ठगी

वहीं पीड़ित जेल जाने के डर से ठगों के झांसे में आ गया। जिसके बाद आरोपियों ने उनके बैंक खातों की जानकारी ली और अलग-अलग खातों में कुल 30 लाख 25 हजार 791 रुपए ट्रांसफर करवा लिए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने 2024 में राज्य साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी।

हाईटेक नेटवर्क का खुलासा

पुलिस ने जांच के दौरान सबसे पहले राजेश कुमार को ट्रैक किया, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रान्सफर कराई गई थी। उसकी निशानदेही पर लखीमपुर खीरी से मास्टरमाइंड सौरभ वर्मा को दबोचा गया। पूछताछ में पता चला कि सौरभ वर्मा का नेटवर्क बेहद हाईटेक और विस्तृत है। वह ठगी की रकम को डाइवर्ट करने के लिए देशभर में म्यूल खाते संचालित कर रहा था। आरोपियों से पूछताछ में और लोगों के नाम भी सामने आए हैं। जिसको लेकर राज्य साइबर सेल पुलिस कार्रवाई में जुटी हुई है।

देशभर में फैला नेटवर्क

जांच में यह बात भी सामने आई कि इस गिरोह का नेटवर्क 16 राज्यों में फैला हुआ है और इन्होंने देश के कई लोगों को अपना शिकार बनाया है। आरोपियों के बैंक खाते, श्रीनगर, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद और वाराणसी जैसे कई बड़े शहरों में मिले हैं।

डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं

राज्य साइबर सेल पुलिस ने लोगों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे कॉल पर घबराएं नहीं और तुरंत सरकार की ओर से जारी किए गए नम्बर 1930 पर शिकायत करें। जिस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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