सिरसा। हरियाणा के सिरसा जिले के रानियां थाने से एक बड़ी और हैरान करने वाली प्रशासनिक खबर सामने आई है। रानियां थाना प्रभारी सुखबीर सिंह को अचानक उनके पद से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया गया है। पुलिस विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। अब उनकी जगह थाने के एडिशनल एसएचओ को नया कार्यभार सौंपा गया है। रानियां थाना क्षेत्र में पिछले 8 महीनों के भीतर यह तीसरी बार है जब किसी थाना प्रभारी को इस तरह अचानक पद से हटाया गया है। इस कार्रवाई के बाद से ही हरियाणा पुलिस एक्शन को लेकर स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पहली बार मिली थी जिम्मेदारी, लग गया बड़ा झटका
जानकारी के अनुसार पीएसआई सुखबीर सिंह को अपने करियर में पहली बार किसी थाने की कमान संभालने का मौका मिला था। इससे पहले वे सीआईए यानी अपराध जांच शाखा में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में उनका ट्रांसफर पंचकूला से सिरसा जिले में हुआ था और उन्हें रानियां थाने की बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन वे इस पद पर ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाए। पुलिस के उच्च अधिकारियों के मुताबिक उनके खिलाफ कुछ ऐसी शिकायतें आ रही थीं, जिन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन था।
जनता से खराब व्यवहार और पारिवारिक कलह बनी वजह
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक थाना प्रभारी सुखबीर सिंह का थाने में अपनी फरियाद लेकर आने वाले आम लोगों के प्रति व्यवहार ठीक नहीं था। इसके साथ ही पिछले कुछ समय से उनका अपनी ससुराल के लोगों के साथ एक गंभीर घरेलू विवाद भी चल रहा था। उनकी ससुराल ऐलनाबाद में है और वे खुद रानियां के सरकारी क्वार्टर में रह रहे थे। इसी पारिवारिक कलह के दौरान किसी बात को लेकर ससुराल पक्ष से उनकी तीखी कहासुनी हो गई। इस पूरी घटना के बाद से थाना प्रभारी सुखबीर सिंह अचानक थाने से गायब हो गए और अपनी ड्यूटी पर नहीं लौटे।
एसपी ने खोला राज, क्यों लिया गया यह सख्त फैसला
इस पूरे मामले पर रानियां के नए थाना प्रभारी की नियुक्ति के साथ ही सिरसा के पुलिस कप्तान यानी एसपी दीपक सहारण ने स्थिति साफ की है। एसपी दीपक सहारण ने बताया कि पीएसआई सुखबीर सिंह के खिलाफ आम जनता की तरफ से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। लोगों का आरोप था कि थानेदार साहब का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं है और वे मामलों पर सही तरीके से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। थाने आने वाले फरियादी उनके काम से बिल्कुल संतुष्ट नहीं थे। इसी वजह से उन्हें पद से हटाने का कड़ा फैसला लेना पड़ा।

