हरियाणा समेत पूरे देश में आज केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण मेडिकल स्टोर बंद हैं। ई-फार्मेसी और बड़े कॉर्पोरेट घरानों के डिस्काउंट के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।

संजीव घनगस, सोनीपत। हरियाणा समेत देशभर में आज मेडिकल स्टोर पूरी तरह से बंद हैं। केमिस्ट संगठनों ने ई-फार्मेसी, कॉर्पोरेट डिस्काउंट और कथित अवैध दवा बिक्री के विरोध में इस राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। केमिस्टों का साफ कहना है कि ऑनलाइन दवा कारोबार के बढ़ने से छोटे व्यापारियों की आजीविका और मरीजों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल हरियाणा स्टेट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन और ऑल इंडिया संगठन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के संयुक्त आह्वान पर की गई है। संगठनों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके चलते मजबूरन उन्हें इस बंद का रास्ता अपनाना पड़ा।

सोनीपत एसोसिएशन का समर्थन और करोड़ों की आजीविका का सवाल

सोनीपत जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने भी इस बंद को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। संगठन का दावा है कि देशभर में करीब 12 लाख 40 हजार से ज्यादा केमिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर इस बड़े आंदोलन से सीधे जुड़े हुए हैं, जबकि 4 से 5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी पारंपरिक व्यापार पर निर्भर करती है। सोनीपत एसोसिएशन के प्रधान सुरेश कादियान ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में अवैध ई-फार्मेसी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इस अनियंत्रित ऑनलाइन व्यवस्था के कारण जमीन पर काम करने वाले पारंपरिक मेडिकल स्टोर संचालकों का पूरा कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

बिना पर्ची के दवा बिक्री और कॉर्पोरेट डिस्काउंट से व्यापार को खतरा

केमिस्ट संगठनों ने चिंता जताते हुए कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना वैध डॉक्टर पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के धड़ल्ले से दवाइयों की बिक्री हो रही है, जिससे आम मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा बड़े कॉर्पोरेट घरानों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट और प्रिडेटरी प्राइसिंग (बाजार बिगाड़ने वाली मूल्य नीति) को भी केमिस्टों ने एक बड़ा संकट बताया है। उनका आरोप है कि बड़ी कंपनियां भारी छूट का लालच देकर छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों के पारंपरिक कारोबार को खत्म करने की लगातार कोशिश कर रही हैं, जिससे बाजार की निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।

मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल और सरकार से नियंत्रण की मांग

इस आंदोलन के माध्यम से केमिस्ट एसोसिएशन ने मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए हैं। इनमें बिना वैध डॉक्टर पर्ची के ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री, एंटीबायोटिक और नशे की आदत बनाने वाली दवाओं तक आम लोगों की आसान पहुंच, फर्जी पर्चियों का गलत इस्तेमाल और बाजार में नकली दवाइयों के फैलने का बढ़ता खतरा शामिल है। संगठन ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि देश में ई-फार्मेसी पर तुरंत सख्त कानूनी नियंत्रण लगाया जाए, प्रिडेटरी प्राइसिंग को रोका जाए और छोटे मेडिकल व्यापारियों की आजीविका तथा मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।