वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के अस्थावां निवासी सोनू राम की संदिग्ध मौत और पुश्तैनी जमीन पर कथित जबरन कब्जे के मामले में न्याय की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। घटना के तीन महीने बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित चंद्रवंशी परिवार संघ ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने पुलिस को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

​क्या है पूरा मामला और कैसे हुई घटना?

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संघ के नेता कौशल कुमार ने सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि 4 मई को सोनू राम अपने घर से अचानक लापता हो गए थे। इसके बाद 8 मई को मानपुर थाना क्षेत्र से उनका एक शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान उनकी जेब में मिले पहचान पत्र के आधार पर सोनू राम के रूप में हुई।
​परिजनों के मुताबिक, इस घटना से पहले अस्थावां के रहने वाले दारा यादव, बिकेश यादव और मुकेश यादव ने कथित तौर पर डर और दबाव बनाकर सोनू राम कीमती पुश्तैनी जमीन अपने नाम लिखवा ली थी। जब सोनू की पत्नी माधुरी देवी और उनके बेटे को इस साजिश की भनक लगी, तो उन्होंने आरोपियों से पैसे की मांग की। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने उन्हें गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। इस सिलसिले में 9 मई को मानपुर थाने में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी।

​पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल और समझौते का दबाव

​चंद्रवंशी परिवार संघ ने अस्थावां और मानपुर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नेताओं का आरोप है कि नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पिछले तीन महीने से पुलिस केवल टालमटोल कर रही है। कभी सुराग न मिलने का बहाना बनाया जाता है, तो कभी डीएसपी के सुपरविजन का हवाला देकर मामले को लटकाया जाता है।
​संघ ने थाना प्रभारी पर आरोपियों के साथ मिलीभगत कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का यह भी दर्द है कि केस वापस लेने के लिए उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। हालांकि, इन प्रशासनिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

​एक हफ्ते का अल्टीमेटम और आक्रोश मार्च की चेतावनी

​न्याय की आस लगाए बैठे चंद्रवंशी परिवार संघ ने पुलिस-प्रशासन को स्पष्ट रूप से 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और पीड़ित परिवार को उनकी पुश्तैनी जमीन वापस नहीं दिलाई गई, तो बिहारशरीफ जिला मुख्यालय में एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला जाएगा। जरूरत पड़ने पर इस आंदोलन को पूरे बिहार में व्यापक स्तर पर फैलाया जाएगा।
​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कौशल कुमार के साथ-साथ अशोक कुमार, संतोष भारती, निशांत कुमार, सुनील कुमार और सबलू कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस चेतावनी के बाद कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।