World Earth Day: रायपुर. आज 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है. यह दिन हमारी धरती के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझाने के लिए समर्पित है. इस दिन पृथ्वी पर विकास के विनाशकारी प्रभावों पर चिंता जाहिर की जाती है और इसके समाधान पर विश्वव्यापी चर्चा की जाती है. दुनिया निरंतर तरक्की की राह पर है और नित नये आविष्कारों ने मानव जीवन को सुलभ बनाया है, लेकिन जिस पृथ्वी पर हम रह रहें हैं, उसके निरंतर विनाश पर जिस स्तर पर आंसू बहना चाहिये, उसकी कमीं दिखाई देती है. सस्टेनेबल डेवलपमेंट की अवधारणा पर काम करने की वकालत तो की जाती है, लेकिन इस पर प्रभावी अमल खास तौर पर भारत देश के संदर्भ में नहीं की जा रही है. बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने पृथ्वी के अस्तित्व पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. ऐसे में यह दिवस हमें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है.

आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेगी

पृथ्वी ही ब्रह्मांड का एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां जीवन जीने की संभावना बताई जाती है. हमें इसी ग्रह में शुद्ध हवा, पानी, भोजन और रहने योग्य वातावरण मिल पाता है. लेकिन बढ़ते औद्योगीकरण, जंगलों की अंधाधुंध कटाई और चौतरफा प्रदूषण के कारण पर्यावरण तेजी से खराब हो रहा है. पृथ्वी दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि यदि तत्काल हमने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेगी और उन्हें इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

इतिहास और शुरुआत

पृथ्वी दिवस की शुरुआत 1970 में अमेरिका के सीनेटर Gaylord Nelson द्वारा की गई थी, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन शुरू किया था. इस आंदोलन में धीरे धीरे लाखों लोग जुड़ने लगे और बाद में यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गई और आज 190 से अधिक देशों में इसे विश्व पृथ्वी दिवस के स्वरुप में मनाया जाता है. Earth Day Network इस अभियान को वैश्विक स्तर पर संगठित करता है. पृथ्वी दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित करना है. इसके तहत प्रदूषण को कम करने, जैव विविधता की रक्षा करने, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता फैलाने का अभियान चलाया जाता है. यह दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक चेतावनी, एक संकल्प और एक जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है. यह हमें याद दिलाता है कि जिस खूबसूरत पृथ्वी पर हम रहते हैं, वह हमारी सबसे मूल्यवान धरोहर है और उसकी रक्षा करना हम सबका परम कर्तव्य है.

वर्तमान परिदृश्य

पूरे विश्व में तीव्र विकास दर की अंधाधुंध होड़ मची हुई है और इस होड़ में हम अपनी जननी की उपेक्षा ही कर रहें हैं. बहुत दुख की बात यह है कि हम अपनी ही पृथ्वी को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं. आज हम जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग,जंगल कटाई और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं. वायु प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि हमें स्वच्छ हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है, खास तौर पर महानगरों में अनियंत्रित विकास के चलते वायु प्रदूषण मानव जीवन की सबसे कठिन चुनौती बन गई है. मानवीय लापरवाही के चलते नदियां और जल स्रोत लगातार दूषित हो रहे हैं, जिससे स्वच्छ पेयजल की कमी होती जा रही है. वनों की अंधाधुंध कटाई के चलते वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में है और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है. तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है.

यदि हम इसी गति से प्रकृति का निरंतर दोहन करते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब इस खूबसूरत ग्रह पृथ्वी पर जीवन संकट में पड़ जाएगा. इसलिए यह समय की मांग है कि हम सभी अभी से जागरूक हों और ठोस कदम उठाएं. अब प्रश्न यह उठता है कि हम, एक सामान्य नागरिक के रूप में, क्या कर सकते हैं? इसका उत्तर बहुत सरल है – हम छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं. सबसे पहले हमें पेड़ लगाने और उनकी रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए. जंगलों की कटाई और उनके स्थान पर कंक्रीट की इमारत बनाने से विकास भले दिखाई देता हो, लेकिन दरअसल यह विनाश का ही संकेत है. प्लास्टिक पृथ्वी का सबसे बड़ा दुश्मन है, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में प्लास्टिक का चलन इतना बढ़ गया है कि इससे सभी तरह का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है. इसलिये प्लास्टिक के उपयोग को हर स्तर पर हतोत्साहित करना होगा. हमें पानी और बिजली की बचत करनी चाहिए. ग्लोबल वार्मिंग के चलते भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, इसलिये पानी की एक-एक बूंद और ऊर्जा का हर स्रोत हमारे लिए अनमोल है. हमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें.

पृथ्वी दिवस हमें यह सिखाता है कि यदि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखेंगे, तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा. हमें यह समझना होगा कि यह पृथ्वी केवल हमारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी है. यदि हम आज इसकी रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में हमारे बच्चे एक प्रदूषित और असंतुलित वातावरण में जीवन जीने के लिए मजबूर होंगे और उसके लिये केवल हम ही दोषी माने जायेंगे.

आज के इस अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम सब पर्यावरण की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. हम अपने दैनिक जीवन में ऐसे बदलाव लाएँगे, जो पृथ्वी के लिए लाभकारी हों. हम न केवल स्वयं जागरूक बनेंगे, बल्कि दूसरों को भी जागरूक करेंगे. अंत में मैं अपनी बात एक संदेश के साथ समाप्त करना चाहूँगा कि “पृथ्वी हमें जीवन देती है, अब हमारी बारी है कि हम पृथ्वी को बचाएँ।” आइए हम सभी मिलकर यह प्रण लें कि हम अपनी पृथ्वी को स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित बनाएँगे. पृथ्वी हमारी मां है और इसकी रक्षा करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है.

लेखक – मनोज सिंह बघेल
एडिटोरियल डायरेक्टर
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