रायपुर। हर वर्ष आषाढ़ मास में आयोजित होने वाला एक धार्मिक आयोजन जगन्नाथ रथ यात्रा, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की दिव्य झांकी के साथ 16 जुलाई (गुरुवार) को उड़ीसा के पुरी धाम से निकलने वाली इस विश्वविख्यात यात्रा इस वर्ष दुर्लभ संयोग के साथ है। इसी दिन कर्क संक्रांति का होना विशेष संयोग बना रहा है जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ा है।
सामान्यतः भक्त मंदिर जाकर अपने इष्ट का दर्शन करते हैं परंतु ईश्वर का स्वयं भक्तों के पास आना रथ यात्रा का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संदेश है। भगवान जगन्नाथ का अपने विशाल रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करना दर्शाता है कि परमात्मा केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे हर उस स्थान पर हैं जहाँ-जहाँ उनके सच्चे भक्त हैं।
हर वर्ग, हर ओहदे और हर परिस्थिति का व्यक्ति इस दिन समान रूप से भगवान के रथ को खींच सकता है। रथ यात्रा के दिन समर्पण और भक्ति का चरम रूप देखने को मिलता है। आज अपने राष्ट्र के परिपेक्ष्य में भी यही भावना आवश्यक है क्योंकि इस विपरीत परिस्थिति में देश के विकास रथ को भी ऐसे ही मिल-जुल कर खींचने की ज़रूरत है।
रथ यात्रा पर्व का दर्शन गूढ़ है। जीवन के तीन आयामों, शरीर, मन और आत्मा का प्रतीक माने जाते हैं रथ यात्रा के तीन रथ। आत्मा जीवन रूपी रथ में यात्रा कर रही है जिस तरह से भगवान, रथ में विराजमान हैं। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से जोड़ने का काम करते हैं रथ को खींचने वाले हजारों हाथ जो इस बात का प्रतीक हैं कि मनुष्य का जीवन केवल व्यक्तिगत प्रयास से नहीं बल्कि सामूहिक सहयोग से आगे बढ़ता है।इसके अलावा रथ अपने आप में गतिमान जीवन का प्रतीक है।
हजारों वर्ष पुरानी रथ यात्रा की परंपरा में विशेष विधि से बनाए गए तीन भव्य रथ—नंदीघोष (जगन्नाथ), तालध्वज (बलभद्र) और दर्पदलन (सुभद्रा) का निर्माण हर वर्ष किया जाता है। नए रथ का निर्माण यह दर्शाता है कि जीवन में नवीनता और पुनर्जन्म बहुत महत्वपूर्ण है।
रथ यात्रा का सबसे उल्लेखनीय पक्ष इसका सामाजिक प्रभाव है। जाति, वर्ग और भेदभाव की सीमाओं को समाप्त करने वाले इस पर्व में हज़ारों की संख्या में भक्त भगवान के रथ को खींचते हैं जो सामाजिक समानता का सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा यह आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का काम करता है।
कर्क संक्रांति वह समय है जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है ऐसे समय में रथ यात्रा का होना बहुत शुभ माना जा रहा है। जानकार इस संयोग को आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक शुद्धि का संकेत बता रहे है। इस दुर्लभ क्षण में बाहरी यात्रा (रथ यात्रा) और आंतरिक यात्रा (आध्यात्मिक साधना) एक साथ चले तो यह महान दिन और सार्थक होगा।
आध्यात्मिक चेतना, दार्शनिक गहराई और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम है यह विशेष दिन। कामना यही है कि इस बार जब लाखों हाथ मिलकर भगवान का रथ खींचें तब एक वैभव शाली परंपरा के निर्वहन के साथ मानवता की सुंदर तस्वीर भी बननी चाहिए।
निलाचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः॥

सलाहकार संपादक न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

