परवेज खान (यमुनानगर)। यमुनानगर ज़िले की जगाधरी अनाज मंडी में गेहूं उठान और भुगतान को लेकर सियासत और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा टकराव सामने आया है।

मार्केट कमेटी चेयरमैन विपुल गर्ग का दावा है कि मंडी में व्यवस्थाएं सुचारू हैं, जबकि यमुनानगर आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मनीष कंबोज ने इन दावों की पोल खोलते हुए गंभीर सवाल उठा दिए हैं।“सब ठीक‑ठाक” बनाम “गहरी समस्या”जगाधरी मार्केट कमेटी चेयरमैन विपुल गर्ग ने बताया कि जगाधरी की अनाज मंडी में अब तक 4 लाख 29 हज़ार क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई है और इसमें से 2 लाख 73 हज़ार क्विंटल गेहूं का उठान हो चुका है।
उनका कहना है कि इस दौरान किसानों और आढ़तियों को मंडी में रत्ती भर भी दिक्कत नहीं झेलनी पड़ी है और व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है।मगर यमुनानगर आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मनीष कंबोज इस नर्मदार्शन से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक, अब तक केवल 55 से 60 फ़ीसदी गेहूं का ही उठान हो पाया है, जबकि इस समय तक 85 से 90 फ़ीसदी लिफ्टिंग हो जानी चाहिए थी।
उनका आरोप है कि इस देरी की वजह से किसानों को पिछले 15 दिनों से भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।
भुगतान, बायोमैट्रिक और J‑फॉर्म का सवाल
मनीष कंबोज ने सवाल उठाया कि जब मंडी में बायोमैट्रिक और पोर्टल‑आधारित सिस्टम लागू है, तो तब भी किसानों के अकाउंट में रियल‑टाइम पेमेंट क्यों नहीं हो रही है? उनका कहना है कि नियम के अनुसार जैसे ही गेहूं का उठान फाइनल होता है, उसके बाद J‑फॉर्म के जरिए पेमेंट की प्रक्रिया भी त्वरित होनी चाहिए, लेकिन अभी यह सिस्टम धीमा चल रहा है, जिससे किसान और आढ़ती दोनों तरफ़ परेशान हैं।
जगाधरी से निकलकर जिले भर में समस्या
कंबोज का दावा है कि यह मुद्दा सिर्फ जगाधरी मंडी तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यमुनानगर ज़िले की सभी 12 अनाज मंडियों में उठान और भुगतान की गति धीमी है और हर जगह किसानों को पेमेंट के लिए लंबा इंतज़ार झेलना पड़ रहा है। वहीं कई रिपोर्ट्स और आधिकारिक आँकड़ों से भी पता चलता है कि ज़िले में करीब 60 फ़ीसदी के आसपास ही गेहूं का उठान हुआ है, जबकि आवक और खरीद आंकड़े इससे काफी आगे हैं।
आगे क्या?
इस पूरे घटनाक्रम से साफ होता है कि दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। किसानों की मेहनत और आढ़तियों की व्यवस्था को लेकर जगाधरी मंडी से लेकर पूरे यमुनानगर ज़िले में व्यवस्थाओं में खामी सामने आ रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और मार्केट कमेटी इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए किसानों और आढ़तियों दोनों को किस तरह राहत देती है।

