संजय कुमार, जींद। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। जींद में कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ रोष जताया और 11, 12 और 13 अगस्त 2026 को तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल करने का ऐलान किया। कर्मचारियों का कहना है कि लंबित मांगों पर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।

संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले हुआ प्रदर्शन

जींद में आयोजित धरने की अध्यक्षता संयुक्त रूप से सुरेंद्र जागलान, राजेश, कश्मीर मलिक और रामधीर ने की। मंच संचालन महेश ने किया। प्रदर्शन के दौरान बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों ने निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

धरने को जींद शहर के पार्षदों और कांग्रेस जिला अध्यक्ष ऋषिपाल ने भी समर्थन दिया। सतपाल कुंडू, डॉ. बलबीर सोयरान, विक्की, महाबीर रेडू और महिपाल कौशिक सहित अन्य लोगों ने कर्मचारियों के आंदोलन में साथ देने की बात कही।

मांगों पर फैसला नहीं होने से नाराज कर्मचारी

राज्य उपप्रधान संजीव ने कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों की मांगों का डिमांड चार्टर पहले ही सरकार को सौंपा जा चुका है, लेकिन अभी तक मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से लगातार बातचीत की जा रही है, लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है।

गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली लाइसेंस का विरोध

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह में सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था के समानांतर निजी कंपनियों को बिजली वितरण का लाइसेंस देने की तैयारी की जा रही है।

इसके अलावा कृषि बिजली आपूर्ति के लिए अलग डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी बनाने की प्रक्रिया को भी कर्मचारियों ने बिजली व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में कदम बताया।

कर्मचारियों ने सरकार से एग्रीकल्चर डिस्कॉम के गठन की प्रक्रिया रोकने और गुरुग्राम-नूंह में निजी बिजली वितरण लाइसेंस को रद्द करने की मांग की।

मांगें नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल से पहले सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

कर्मचारियों ने कहा कि यदि कृषि डिस्कॉम के गठन से जुड़ा कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया तो इसे आंदोलन के संकेत के रूप में माना जाएगा। इसके बाद कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला कर सकते हैं।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष

धरने के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों ने एकजुट होकर सरकार से जल्द समाधान की मांग की। कर्मचारियों ने कहा कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ उनका संघर्ष मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।

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