कर्ण मिश्रा, मुरैना/ग्वालियर। नदियों से अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि तल से होने वाला रेत खनन संपूर्ण नदी तंत्र पर एक विनाशकारी प्रभाव डाल रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर अब रोकना ही होगा। कोर्ट ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी को तलब करते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने नदियों की धारा और उनकी अनमोल प्राकृतिक संपदा को उजाड़ने वाले अवैध रेत खनन को लेकर अत्यधिक गंभीर रुख अपनाया है। ये पूरा मामला राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य से जुड़ा है, जो 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है। कोर्ट ने अभयारण्य के आसपास सुरक्षा और वैधानिक उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति यानी CEC से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया है। CEC 2023 से एक वैधानिक निकाय है, जिसे मूल रूप से 2002 में गठित किया गया था।

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राजस्थान, MP-UP को 2 सप्ताह में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए दो सप्ताह के भीतर अपना अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है। SC की चिंता सिर्फ चंबल तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की केन नदी में जारी अवैध खनन पर भी संज्ञान लिया गया है। सुनवाई में पिछले महीने राजस्थान की घटना का भी जिक्र आया, जहां अवैध खनन रोकने गए एक वन रेंजर की डंपर से कुचलकर हत्या कर दी गई थी।

इस पर पीड़ा जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध रेत से लदे वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं और नदियों को इस तरह तबाह नहीं होने दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों को चाटने वाले अवैध खननकर्ताओं और उनके संरक्षकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और प्रीवेंटिव डिटेंशन जैसे सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। अब इस मामले में 4 नवंबर को CEC की रिपोर्ट और राज्यों के हलफनामों पर अहम सुनवाई होगी।

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