दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूप से सवाल उठाए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से कहा कि वह फॉर्म 6, 7 और 8 में बदलाव नहीं कर सकता. चुनाव आयोग ने कहा कि वह वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के आवेदन स्वीकार करने की तारीख आगे बढ़ाएगा.

अदालत ने साफ संकेत दिया है कि लाखों मतदाताओं को लेकर अपनाई गई मौजूदा प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने की जरूरत है. 

दिल्ली एसआईआर में पहले से मतदाता रहे लोगों को फॉर्म-6 भरने के लिए कहे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया है. कोर्ट ने पूछा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर करीब 43 लाख मतदाताओं में जिनके नाम ‘शिफ्टेड या अनुपस्थित’ श्रेणी में दर्ज हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है.

दो चुनाव आयुक्तों ने SIR के फॉर्म 6 बदलावों पर आपत्ति जताई थी. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में हुई. बेंच ने कहा कि फॉर्म 6, 7 और 8 तय फॉर्मेट हैं चुनाव आयोग इनमें बदलाव नहीं कर सकता. साथ ही बेंच ने यह भी पूछा कि बेंच ने पूछा कि राष्ट्रीय राजधानी में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने पर इतनी जल्दी (30 अक्टूबर) की समयसीमा क्यों रखी जा रही है?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने कहा है कि 2 सप्ताह बाद मामले पर अगली सुनवाई की जाएगी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 43 लाख लोगों को नाम दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है? जबकि फॉर्म 6 नए मतदाताओं के लिए होता है.

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