वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया अथवा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना पूर्व अनुमति प्रसारित, अपलोड, पोस्ट, री-पोस्ट, मॉनेटाइज या संग्रहित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

याचिका में विभिन्न हाईकोर्ट को भी पक्षकार बनाए जाने का आग्रह किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक उल्लेख पर आंध्र प्रदेश, इलाहाबाद, बॉम्बे, कलकत्ता, गुजरात, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य हाईकोर्ट को प्रतिवादी बनाया। इनमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भी प्रतिवादी क्रमांक 12 के रूप में शामिल है। बेंच ने सभी संबंधित हाईकोर्ट को निर्देशित किया कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रसारित लाइव स्ट्रीमिंग और कोर्ट कार्यवाही की रिकॉर्डिंग से संबंधित मॉडल नियमों को अपनाने की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में लगातार और निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग के प्रभाव तथा इसकी व्यवहारिकता की जानकारी भी देने को कहा गया है।

अंतरिम व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल अथवा संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के उपयोग, प्रसार, अपलोड, ट्रांसमिट, संशोधित, स्टोर या होस्ट नहीं किया जा सकेगा।

यह आदेश 24 जुलाई 2026 को हर्षिता ग्रोवर की रिट याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इस अंतरिम आदेश का मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों द्वारा न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अधिकृत समाचार माध्यम पूर्ववत कोर्ट कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकेंगे।

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