14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की भी मांग
रांची। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध CBI जांच की मांग की गई है।
परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की याचिका पर CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की। याचिका में कथित गड़बड़ियों की जांच के साथ परीक्षा रद्द कर नए सिरे से प्रारंभिक परीक्षा कराने की मांग की गई है।
OMR कॉपी वायरल होने के बाद उठा विवाद
याचिका के मुताबिक, 2 जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद एक सफल अभ्यर्थी की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल हुई। इसमें कथित तौर पर प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से 48 सवालों के जवाब दिए जाने के बावजूद अभ्यर्थी के सफल होने पर सवाल उठाए गए। इसके बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर रांची में विरोध प्रदर्शन भी हुए।
स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की भी मांग
याचिकाकर्ता ने झारखंड से बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। समिति में फोरेंसिक साइंस, IT, साइबर सिक्योरिटी, OMR मूल्यांकन और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
याचिका में OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट तथा परीक्षा से जुड़े मूल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, बायोमेट्रिक डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
अब केंद्र और राज्य सरकार को देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब केंद्र और झारखंड सरकार को मामले में अपना पक्ष रखना होगा। याचिका में अदालत की निगरानी में सुरक्षा उपायों के साथ नई प्रारंभिक परीक्षा कराने की भी मांग की गई है।

