सूरत। न्यू सिविल अस्पताल (एनसीएच) में रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या की आत्महत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि सर्जरी विभाग से आई एक गुमनाम शिकायत ने अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा दिया। शिकायत मिलने के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में एंटी-रैगिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई। हालांकि, देर रात तक चली गहन जांच के बाद एंटी-रैगिंग स्क्वॉड और कमेटी को किसी भी तरह की प्रताड़ना या रैगिंग का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
27 अगस्त को मिली थी गुमनाम शिकायत
जानकारी के मुताबिक, 27 अगस्त को शाम करीब 5:10 बजे डीन कार्यालय को एक गुमनाम पत्र प्राप्त हुआ था। पत्र में किसी व्यक्ति विशेष पर सीधे आरोप नहीं लगाए गए थे, बल्कि अत्यधिक ड्यूटी शेड्यूल, छुट्टी न मिलने और सीनियरों द्वारा परेशान किए जाने जैसी व्यवस्थागत समस्याओं का उल्लेख किया गया था। मामला संवेदनशील होने के कारण प्रशासन ने एंटी-रैगिंग स्क्वॉड को सक्रिय किया और संबंधित रेजिडेंट डॉक्टरों से अकेले में बातचीत कर स्थिति जानी।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता डॉक्टर ने अपनी पहचान उजागर की और स्वीकार किया कि शिकायत उसी ने भेजी थी। साथ ही, डॉक्टर ने यह भी पुष्टि की कि विभाग द्वारा उसकी कार्य संबंधी समस्याओं का समाधान कर दिया गया है और अब उसे कोई शिकायत नहीं है।
इंचार्ज डीन ने रैगिंग से किया इनकार
मामले पर इंचार्ज डीन डॉ. हरि मेनन ने बताया कि शिकायत में किसी का नाम नहीं था और न ही इसमें अभद्र भाषा, गाली-गलौज या शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना की बात कही गई थी। जांच के बाद रिपोर्ट को कॉलेज काउंसिल की समीक्षा के बाद डायरेक्टर कार्यालय भेज दिया गया है। फिलहाल जांच में रैगिंग का कोई मामला सामने नहीं आया है।
डॉ. हर्ष पंड्या केस में VHP का प्रदर्शन, HOD की बर्खास्तगी की मांग
दूसरी ओर, शनिवार को विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने न्यू सिविल अस्पताल के डीन कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि डॉ. हर्ष पंड्या को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में विभाग की एचओडी डॉ. सुमैया मुल्ला को तुरंत पद से बर्खास्त किया जाए।
वीएचपी नेताओं ने आरोप लगाया कि डॉ. हर्ष को परीक्षा में फेल करने की धमकियां देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर और राज्य सरकार के समक्ष शिकायत दर्ज कराएंगे।
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