गुजरात के सूरत शहर में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिना किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के मरीजों के जान-माल से खिलवाड़ कर रहे आठ कथित फर्जी डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सूरत पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा पांडेसरा इलाके में अंजाम दी गई।

डमी मरीज भेजकर पकड़ी गई धांधली

16 सितंबर को सूरत पुलिस आयुक्त के निर्देश और डीसीपी राजदीपसिंह नकुम की निगरानी में यह विशेष अभियान चलाया गया। एसओजी को गुप्त सूचना मिली थी कि पांडेसरा क्षेत्र में कई अयोग्य व्यक्ति डॉक्टर बनकर दवाखाने चला रहे हैं। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने डमी मरीज भेजकर जांच कराई, जिसके बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल पटेल और एसओजी की संयुक्त टीमों ने एक साथ आठ अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की।

कंपाउंडर और 12वीं पास बने थे ‘डॉक्टर’

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सालों से लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे थे:

  • 12वीं पास झोलाछाप: प्रिंस क्लिनिक चलाने वाला पार्थ देबनाथ (12वीं पास) पिछले दो साल से प्रैक्टिस कर रहा था। इसी तरह एसके क्लिनिक का सिद्धार्थ देबनाथ, साई बाबा क्लिनिक का सजल बिस्वास, विजय यादव और संदीप सोनावणे भी महज 12वीं पास निकले।
  • पूर्व अनुभव का गलत फायदा: आरोपियों में से कई पहले अस्पतालों में कंपाउंडर या ऑपरेशन थिएटर (OT) असिस्टेंट के रूप में काम कर चुके थे। वहीं, श्यामनारायण गुप्ता (श्याम क्लिनिक) और मनोरंजन बिस्वाल (प्रगति क्लिनिक) केवल बीएससी पास थे।

दवाएं जब्त, एक किशोर की मौत से भी जुड़े तार

छापेमारी के दौरान टीमों ने विभिन्न प्रकार की एलोपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन और सिरप जब्त किए, जिनकी कुल कीमत 98,825 रुपये आंकी गई है। सभी आठों आरोपियों के खिलाफ पांडेसरा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपी पार्थ देबनाथ पहले ‘स्वास्तिक क्लिनिक’ चलाता था। उस पर आरोप है कि एक महीने पहले उसके गलत इलाज से 14 वर्षीय अभिषेक सिंह नाम के किशोर की जान चली गई थी। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि अवैध रूप से चल रहे ऐसे क्लीनिकों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m