सूरत। सूरत से उदयपुर के बीच प्रस्तावित पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के संचालन शुरू होने से पहले ही इसके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूरत कोचिंग डिपो में ट्रेन के रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और तकनीकी स्टाफ का अभाव पाया गया है। इस संबंध में पश्चिम रेलवे ने रेलवे बोर्ड को एक पत्र लिखकर कोचिंग डिपो में व्याप्त 11 प्रमुख कमियों की ओर ध्यान आकर्षित कराया है और जल्द से जल्द आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि रेलवे बोर्ड ने 31 अगस्त को सूरत-उदयपुर-सूरत वंदे भारत (ट्रेन संख्या 26903/04) को मंजूरी दी थी। यह सूरत के लिए पहली वंदे भारत ट्रेन थी और इसका प्राथमिक मेंटेनेंस सूरत डिपो में ही प्रस्तावित था। हालांकि, मैकेनिकल विभाग के अनुसार वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन के रखरखाव के लिए जिन विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है, वे फिलहाल सूरत डिपो में मौजूद नहीं हैं।

डिपो में उजागर हुईं ये मुख्य 11 कमियां:

  1. चार-स्तरीय निरीक्षण व्यवस्था का अभाव: ट्रेन की नीचे, साइड, अंदर और छत की जांच के लिए कैटवॉक होने के कारण लिफ्ट ट्रॉली की आवाजाही संभव नहीं है। कर्मचारियों को पारंपरिक सीढ़ी का सहारा लेना पड़ता है।
  2. रूफ वर्किंग प्लेटफॉर्म की अनुपस्थिति: कोच की छत पर लगे उपकरणों की मरम्मत के लिए पूरी ट्रेन की लंबाई में प्लेटफॉर्म की कमी है।
  3. एडजस्टेबल वर्किंग प्लेटफॉर्म नहीं होना: विभिन्न ऊंचाइयों पर काम करने के लिए समायोज्य (एडजस्टेबल) प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं हैं।
  4. मेंटेनेंस पिट लाइन न होना: पूरी तरह कवर्ड शेड वाली मेंटेनेंस पिट लाइन का डिपो में अभाव है।
  5. 650 वोल्ट सहायक बिजली सप्लाई: वंदे भारत की जरूरतों के लिए 650V सप्लाई आवश्यक है, जबकि वर्तमान में केवल 415V AC सप्लाई ही उपलब्ध है।
  6. कंप्रेस्ड एयर लाइन की कमी: मेंटेनेंस के लिए पर्याप्त और केंद्रित कंप्रेस्ड एयर सप्लाई की सुविधा नहीं है।
  7. स्टाफ की भारी कमी: 8 कोच की वंदे भारत रेक के लिए डिपो में जरूरत के मुकाबले पर्याप्त मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं है।
  1. बोगी ड्रॉप टेबल न होना: एक ही ट्रैक पर कम से कम दो बोगी ड्रॉप टेबल की जरूरत है, जो फिलहाल अनुपलब्ध हैं।
  2. अंडरफ्लोर व्हील लेथ का अभाव: पहियों की घिसाई और रखरखाव के लिए आवश्यक अंडरफ्लोर व्हील लेथ डिपो में उपलब्ध नहीं है।
  3. स्टोर/वेयरहाउस की कमी: मेंटेनेंस में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक स्पेयर पार्ट्स और आवश्यक सामग्रियों के भंडारण के लिए अलग स्टोर उपलब्ध नहीं है।
  4. समय-सारणी संबंधी अड़चनें: उदयपुर में मेंटेनेंस संभव न होने और सूरत लौटने के बीच समय अंतराल कम होने के कारण मौजूदा टाइम-टेबल में बदलाव या बुनियादी ढांचे के तत्काल विकास के बिना ट्रेन संचालन में बड़ी अड़चनें आ रही हैं।

डिपो में पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों के अभाव के कारण फिलहाल इस महत्वपूर्ण रेल सेवा के शुरू होने पर सस्पेंस बना हुआ है।

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