अनिल मालवीय, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक अजीबोगरीब प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट के मामले में दमोह पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए और वर्तमान में जेल में बंद निलंबित रेडियोग्राफर हीरा सिंह कौशल का नाम स्वास्थ्य विभाग की जिला स्तरीय प्रशिक्षण सूची में शामिल पाया गया है। विभागीय अधिकारियों की इस बड़ी चूक ने स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
हीरा सिंह कौशल पर फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार करने, बांटने और सरकारी नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा करने के गंभीर आरोप हैं। दमोह पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिक में कथित फर्जी डिग्रियों के आधार पर लोगों को डॉक्टर के रूप में नौकरी दिलाई गई थी। इस मामले में एक दर्जन से अधिक फर्जी डॉक्टरों के नाम सामने आए थे, और मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार कार्यालय में भी आरोपी के पंजीयन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला था। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया था, और वह फिलहाल जेल में बंद है।
निलंबन और जेल में होने के बावजूद सूची में नाम
हैरानी की बात यह है कि कर्मचारी के जेल में होने और निलंबित होने के बावजूद सीएमएचओ कार्यालय से जारी ताजा प्रशिक्षण सूची में उसका नाम बतौर रेडियोग्राफर दर्ज है और उसका पदस्थापना स्थल बिलकिसगंज ही दर्शाया गया है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर सूची तैयार करते समय कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। बिलकिसगंज स्वास्थ्य केंद्र पहले भी कई विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। अब देखना यह होगा कि विभाग इस बड़ी लापरवाही के लिए किसकी जिम्मेदारी तय करता है या इसे सिर्फ एक ‘लिपिकीय त्रुटि’ बताकर मामले को दबा दिया जाता है।

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