सूरत के कपड़ा मार्केट में वीवर्स और ट्रेडर्स को निशाना बनाने वाला एक नया और गंभीर साइबर-कम-फिजिकल फ्रॉड का मामला सामने आया है। इस गिरोह के ठग किसी प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारी (ट्रेडर) की कंपनी प्रोफाइल और GST नंबर का गलत इस्तेमाल कर वीवर्स को बड़ा ऑर्डर देते हैं और रास्ते में ही डिलीवरी वाला टेंपो डायवर्ट कर लाखों रुपये का माल गायब कर देते हैं। इस तरह की 4 से 5 ठगी होने की आशंका जताई जा रही है।
चार चरणों में दिया जाता है ठगी को अंजाम:
- डेटा स्कैनिंग: ठगों का गिरोह सोशल मीडिया, वेबसाइट्स और ट्रेड पोर्टल्स पर सक्रिय रहता है। वहां से यह लोग असली ट्रेडर्स के GST नंबर, फर्म का नाम और अन्य विवरण जुटाते हैं।
- फर्जी ऑर्डर: इसके बाद ठग खुद को उसी नामी फर्म का प्रतिनिधि बताकर वीवर्स को फोन करते हैं और तुरंत कपड़ा भेजने का ऑर्डर देते हैं।
- रास्ते में ट्रैप: वीवर जब माल कपड़े से भरे टेंपो में लोड करवाकर ट्रेडर के गोदाम या दुकान के लिए रवाना करता है, तब ठग दलाल रास्ते में ही टेंपो चालक से संपर्क करता है। वह ड्राइवर से बहाना बनाता है कि ‘पार्टी का फोन आया है और माल को सीधे डाइंग-प्रिंटिंग मिल में प्रोसेसिंग के लिए भेजना है।’
- माल गायब और संपर्क बंद: ड्राइवर को झांसे में लेकर टेंपो को किसी सुनसान गोदाम या निर्जन जगह पर बुलाया जाता है। वहां दूसरे वाहन में कपड़ा ट्रांसफर करा लिया जाता है और ठग अपना मोबाइल नंबर बंद कर भूमिगत हो जाते हैं।
जब वीवर असली ट्रेडर से भुगतान या माल की डिलीवरी की पुष्टि के लिए संपर्क करता है, तब जाकर इस पूरी धोखाधड़ी का पर्दाफाश होता है। इस संगठित गिरोह की सक्रियता से कपड़ा व्यापार से जुड़े वीवर्स और ट्रेडर्स में हड़कंप मच गया है। व्यापारियों को सलाह दी जा रही है कि किसी भी अज्ञात फोन कॉल पर भरोसा करने के बजाय माल रवाना करने से पहले ट्रेडर से सीधा सत्यापन अवश्य करें।
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