Tata Sons Chairman News: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को 2032 तक बढ़ाने के फैसले पर टाटा ट्रस्ट्स ने आपत्ति जताई है। ट्रस्ट ने इसे कंपनी के नियमों के अनुरूप नहीं बताते हुए कहा है कि चेयरमैन की नियुक्ति के लिए उसके दोनों नॉमिनी डायरेक्टर्स की सहमति जरूरी है। टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है। ऐसे में ट्रस्ट का विरोध कंपनी के नेतृत्व से जुड़े इस फैसले को महत्वपूर्ण बना सकता है।

नोएल टाटा ने किया विरोध, वेणु श्रीनिवासन ने दिया समर्थन

17 सितंबर को हुई टाटा संस बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन के दोबारा चेयरमैन बनने के प्रस्ताव पर टाटा ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा ने विरोध में वोट दिया, जबकि दूसरे नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने समर्थन किया।

बोर्ड में प्रस्ताव के पक्ष में चार और विरोध में एक वोट पड़ा। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स का तर्क है कि उसके दो नॉमिनी डायरेक्टर्स में बहुमत के लिए दोनों की सहमति जरूरी थी। इसलिए उसके मुताबिक प्रस्ताव को मंजूर नहीं माना जा सकता।

स्पेशल वोट से भी मंजूरी नहीं मिलने का दावा

ट्रस्ट ने कहा कि यदि प्रस्ताव नियमों के तहत खारिज हो चुका है, तो चेयरमैन के कास्टिंग या स्पेशल वोट से उसे दोबारा मंजूर नहीं किया जा सकता। ट्रस्ट के मुताबिक ऐसा वोट केवल बराबरी की स्थिति में निर्णायक हो सकता है।

साइरस मिस्त्री केस का भी दिया हवाला

टाटा ट्रस्ट्स ने साइरस मिस्त्री मामले का हवाला देते हुए कहा कि टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ट्रस्ट्स के विशेष वोटिंग अधिकारों का समर्थन किया था। ट्रस्ट का कहना है कि कंपनी अब उस पुराने रुख से पीछे नहीं हट सकती।

चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2032 तक बढ़ाने पर विवाद

एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को संकेत दिया था कि वे अगला कार्यकाल नहीं लेंगे। बाद में नॉमिनेशन कमेटी के आग्रह पर उन्होंने अपना फैसला बदला और 17 सितंबर को बोर्ड ने उनका कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर किया। हालांकि, इसे अभी वार्षिक आम बैठक (AGM) की मंजूरी मिलना बाकी है।चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है। नया कार्यकाल मंजूर होने पर वे 2032 तक टाटा संस के चेयरमैन रहेंगे।

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