कुंदन कुमार, पटना। बिहार की सियासत में शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की नई नीति को लेकर घमासान मच गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया पर तीखा सवाल खड़ा करते हुए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यशैली को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्थानांतरण के नाम पर शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धन उगाही का खेल खेला जा रहा है, जिसका सीधा ठीकरा शिक्षा मंत्री के सिर पर फूटेगा।

​शिक्षकों से 30 विकल्पों की मांग पर उठाए सवाल

​कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने सरकार द्वारा शिक्षकों से स्थानांतरण के लिए 30 अलग-अलग विकल्प (ऑप्शंस) मांगे जाने के प्रावधान को पूरी तरह से अव्यवहारिक और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला बताया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कई जिले ऐसे हैं, जहां कुल मिलाकर 30 से ज्यादा उच्च विद्यालय ही मौजूद नहीं हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षकों से 30 जिलों या विद्यालयों के विकल्प मांगना समझ से परे है और यह केवल एक दिखावा मात्र है।
​उन्होंने आशंका जताई कि इस जटिल प्रक्रिया का फायदा उठाकर कंप्यूटर ऑपरेटर और बिचौलिए भारी मात्रा में अवैध वसूली करेंगे। ऑपरेटरों की मनमानी के कारण किसी भी शिक्षक को उसकी इच्छा या जरूरत के विरुद्ध कहीं से भी कहीं स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे भ्रष्टाचार के दरवाजे स्वतः खुल जाएंगे।

​उगाही का अड्डा बन रहा है शिक्षा विभाग

​राजेश राठौड़ ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग इस व्यवस्था को धन उगाही का नया अड्डा बनाने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं और सम्मान देने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी नीतियां लाई जा रही हैं जिनसे शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। स्थानांतरण की इस जटिल और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के कारण शिक्षकों को मनचाही जगह पर तैनाती पाने के लिए मजबूरी में रिश्वत और घूस देनी पड़ेगी।
विभाग की इस लचर कार्यशैली से पूरे शिक्षक समुदाय में भारी असंतोष का माहौल है।

​कांग्रेस ने की विकल्पों की सीमा घटाने की मांग

​सरकार को चेतावनी देते हुए कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और इसमें तुरंत सुधार किया जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि शिक्षकों से स्थानांतरण के लिए 30 के बजाय अधिक से अधिक 5 विकल्प ही मांगे जाने चाहिए। यदि विकल्पों की संख्या सीमित होगी, तो किसी भी स्तर पर धन उगाही और बिचौलियों की दखलंदाजी की गुंजाइश नहीं बचेगी।
​कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया और शिक्षकों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक जोरदार आंदोलन करेगी। इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी के लिए सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी दोषी होंगे।