शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर जारी किए गए एक नए आदेश ने कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने इस आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि विभाग के इस कदम से पूरे प्रदेश के शिक्षकों में भ्रम और असमंजस की स्थिति बन गई है।

आदेश से बनी भ्रम की स्थिति

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने अपने बयान में कहा कि विभाग द्वारा प्रमोशन के लिए टीईटी (TET – शिक्षक पात्रता परीक्षा) क्वालीफाई शिक्षकों की जानकारी मांगी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शिक्षा विभाग अब पदोन्नति (प्रमोशन) में भी TET को अनिवार्य करने जा रहा है? विभाग के इस रुख से शिक्षक समाज बेहद परेशान और आक्रोशित है।

जब परीक्षा ही नहीं हुई, तो अनिवार्यता क्यों?

उपेंद्र कौशल ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल दागते हुए कहा- “अब तक कार्यरत शिक्षकों के लिए विभाग द्वारा TET की परीक्षा का आयोजन तक नहीं किया गया है। जब परीक्षा ही आयोजित नहीं हुई है, तो प्रमोशन में इसकी अनिवार्यता लागू करने का क्या औचित्य है? बिना परीक्षा के अवसर दिए इस तरह की शर्त थोपना पूरी तरह अनुचित है।”

कर्मचारी संगठन की प्रमुख मांगें

शिक्षकों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए संगठन ने सरकार और विभाग के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। शिक्षा विभाग को तत्काल यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन शिक्षकों ने TET क्लियर नहीं किया है, क्या उन्हें प्रमोशन का लाभ मिलेगा या नहीं? संगठन ने मांग की है कि पदोन्नति की प्रक्रिया में से TET की अनिवार्यता को पूरी तरह से मुक्त रखा जाए। शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस विषय पर तत्काल संज्ञान ले और भ्रम दूर करने वाला नया फैसला जारी करे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने इस भ्रम की स्थिति को जल्द दूर नहीं किया और आदेश में संशोधन नहीं किया, तो शिक्षक संगठन इसके विरोध में आगे की रणनीति तैयार करने पर मजबूर होगा।

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