Business Desk – Tejas Mk1A Delivery Delay : देश के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा प्रोजेक्ट्स में शामिल स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A की डिलीवरी में हो रही देरी पर रक्षा मंत्रालय सख्त हो गया है. भारतीय वायुसेना (IAF) को समय पर विमान नहीं मिलने के कारण अब सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर अनुबंध के तहत भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. रक्षा मंत्रालय ने परियोजना की समीक्षा करते हुए HAL से डिलीवरी में हुई देरी का विस्तृत ब्यौरा मांगा है.

क्या है तेजस Mk1A और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
तेजस Mk1A, स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस का उन्नत संस्करण है. इसमें आधुनिक AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, बेहतर एवियोनिक्स और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली जैसी कई नई तकनीकें शामिल हैं. भारतीय वायुसेना के पुराने लड़ाकू विमानों की जगह लेने और उसकी युद्ध क्षमता बढ़ाने में इस विमान की अहम भूमिका मानी जा रही है.
डिलीवरी में आखिर देरी क्यों हो रही है?
HAL को भारतीय वायुसेना को तय समय के अनुसार तेजस Mk1A की डिलीवरी शुरू करनी थी, लेकिन अब तक एक भी विमान सौंपा नहीं जा सका है. देरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी GE Aerospace से F404 इंजन की आपूर्ति में हुई देरी बताई जा रही है. इसके अलावा विभिन्न तकनीकी परीक्षण, सिस्टम इंटीग्रेशन, सॉफ्टवेयर अपग्रेड और जरूरी प्रमाणन प्रक्रियाओं में भी अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है.
रक्षा मंत्रालय क्यों हुआ नाराज?
भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता लगातार चुनौती का सामना कर रही है. ऐसे में तेजस Mk1A की समय पर डिलीवरी बेहद जरूरी मानी जा रही है. डिलीवरी में लगातार हो रही देरी को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने HAL को परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुबंध की शर्तों के तहत कंपनी पर आर्थिक दंड लगाने का विकल्प भी सरकार के सामने है.
क्या होगा HAL पर जुर्माना?
रक्षा मंत्रालय अनुबंध की शर्तों के आधार पर HAL पर पेनल्टी लगाने की संभावना पर विचार कर रहा है. हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. सरकार का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि परियोजना की गति बढ़ाना और भारतीय वायुसेना को जल्द से जल्द विमान उपलब्ध कराना है.
भारतीय वायुसेना पर क्या पड़ेगा असर?
तेजस Mk1A परियोजना में देरी का सीधा असर भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण पर पड़ सकता है. वायुसेना लंबे समय से पुराने लड़ाकू विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नई तकनीक वाले विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है. ऐसे में तेजस की आपूर्ति में देरी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
आगे क्या?
रक्षा मंत्रालय ने HAL से उत्पादन और डिलीवरी की नई समयसीमा पर काम करने को कहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार को उम्मीद है कि वर्ष 2026 के अंत तक तेजस Mk1A के कई विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जा सकेंगे. फिलहाल, मंत्रालय परियोजना की लगातार निगरानी कर रहा है और यदि देरी जारी रहती है तो HAL पर जुर्माने सहित अन्य अनुबंधीय प्रावधान लागू किए जा सकते हैं.
तेजस Mk1A केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का महत्वपूर्ण प्रतीक है. इसलिए इसकी समय पर डिलीवरी सरकार, वायुसेना और रक्षा उद्योग, तीनों के लिए बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है.

