कुंदन कुमार, पटना। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में आई बाढ़ को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। तेजस्वी ने बिहार के साथ सौतेला व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने गुजरात का हवाला देते हुए कहा कि, अगर वहां के किसी नाला में भी बारिश का पानी बढ़ जाता है, तो प्रधानमंत्री गुजरात पहुंच, इसे आपदा घोषित कर गुजरात को हज़ारों करोड़ का पैकेज दे देते हैं।
‘बारिश होने पर ही CM से करते हैं बात’
तेजस्वी यादव ने कहा कि, इसी साल 23 जुलाई को गुजरात में बारिश ही हुई थी, बारिश के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। बारिश मतलब बारिश होने पर ही प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने वहां के CM से conferencing की, Airforce और NDRF को अलर्ट मॉड पर रहने को कहा गया। अभी कुछ साल पहले गुजरात में बाढ़ आई तो प्रधानमंत्री मोदी हवाई सर्वेक्षण करने गए, तुरंत 500 करोड़ का पैकेज दिया। राहत और बचाव के लिए Army, Airforce और NDRF की टीमें लगाई। पीड़ितों को 2-2 लाख रुपए दिए।
क्या यहां के CM को फालतू और हल्का समझते है?
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि, अब देखिए बिहार में बाढ़ से 50 से अधिक लोग मरे हैं। हज़ारों मवेशी गायब हैं, हज़ारों करोड़ का नुकसान हुआ है, 45 लाख लोग प्रभावित हैं, लेकिन सहायता तो छोड़िए प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकला है। यहां मदद करना तो दूर बिहार के CM से फोन पर भी बात नहीं की है। क्या यहां के CM को वो फालतू और हल्का समझते है?
बिहार के साथ इतना भेदभाव क्यों?
तेजस्वी यादव ने कहा कि, हमारे बिहार के साथ इतना भेदभाव क्यों? गुजरात में बाढ़ नहीं बारिश में ही केंद्र सरकार active हो जाती है और बिहार में सैंकड़ों लोगों के मरने और 45 लाख बिहारियों के प्रभावित होने पर भी कोई हलचल नहीं। उन्होंने कहा कि, समझो बिहारियों। हमारे यहां तो ठनका गिरने से ही एक सीजन में सैंकड़ों लोग मर जाते हैं। फिर भी “ठनके” को इन्होंने राष्ट्रीय आपदा सूची में सम्मिलित नहीं किया। केंद्र सरकार कोई मुआवजा नहीं देती। गुजरात में तो बारिश से मरने पर केंद्र 2 लाख रुपए दे देती है।
’30 सांसद और 8 केंद्रीय मंत्री सब गूंगे और बहरे’
तेजस्वी ने कहा कि, पहले बिहार पर आपदा आती थी तो लालू जी, नीतीश जी, चाहे इनके बीच जैसे राजनीतिक दुश्मनी हो लेकिन आपदा के समय बिहार के हक को लेकर एक रहते थे। अब तो 30 सांसद सहित 8 केन्द्रीय मंत्री सब गूंगे, बहरे और अंधे है। ये अपने हक के लिए भी नहीं बोल सकते।
हम तो विपक्ष में हैं। पहले दिन से मांग कर रहे है, प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है अगर केंद्र से पैकेज मिलेगा तो वो सरकार को मिलेगा, बताइए इसमें मेरा क्या भला होगा? अगर मैं नकारात्मक दृष्टिकोण का होता तो केंद्र पर क्यों दबाव बनाता? तेजस्वी बिहार और बिहारियों के लिए मरता और जीता है, यही हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सिखाया है।
हम बिहारियों के लिए शर्म की बात- तेजस्वी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, भाजपाई लोग तो अब सरेआम कहते है कि हमें बिहारियों की कोई चिंता नहीं। भाजपाई कहते है कि 4 साल 11 महीना बिहारियों को उनके हाल पर छोड़ दो। चुनाव के आख़िरी महीना में 5 किलो चावल और 10 हज़ार नगद बांटो और वो सब भूल जाएंगे। हम बिहारियों के लिए कितने शर्म की बात है कि 45 लाख लोग प्रभावित होने के बावजूद सरकार से कहीं कोई सहायता, सहयोग और उम्मीद नहीं।
आख़िर सोचिए ऐसा क्यों? राजनीति से परे यह पूछ रहा हूं, क्यों? बिहार ने अपने हक़ के लिए हमेशा केंद्र को झुकाया है लेकिन अब इस बीजेपी के फेर में बिहार झुक रहा है।
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