कुंदन कुमार/ पटना। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दिल्ली में एक बिहारी युवक, पांडव कुमार की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर एनडीए सरकार और उसके मंत्रियों पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी के बयानों को आधार बनाकर उन्हें असंवेदनशील और अमानवीय करार दिया।

​’यंत्र-तंत्र और षड्यंत्र’ की राजनीति पर प्रहार

​तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से सत्ताधारी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए के नेता ‘यंत्र-तंत्र और षड्यंत्र’ के सहारे सत्ता में आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस, जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अधीन है, ने एक बिहारी युवक की हत्या सिर्फ उसकी पहचान के कारण कर दी। तेजस्वी के अनुसार, सत्ता के अहंकार में डूबे ये नेता अब आम नागरिकों के दर्द के प्रति पूरी तरह से बेपरवाह और बेशर्म हो चुके हैं।

​मांझी और विजय चौधरी के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया

​तेजस्वी ने विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था, मार दिया तो मार दिया, क्या करें? तेजस्वी ने इसे निर्लज्जता और संकीर्ण मानसिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन बताया। वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा की तरह ‘अनभिज्ञ’ बने हुए हैं और उन्हें इस घटना की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।

​नैतिकता और जनता से सीधा सवाल

​तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि क्या ये नेता तब भी इतने ही हृदयहीन और उदासीन होते, अगर मृतक पांडव कुमार की जगह उनका अपना कोई परिजन होता? उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि अगर चुनाव के समय चंद रुपयों के लालच में ऐसे संवेदनहीन लोगों को चुना जाएगा, तो भविष्य में भी इसी तरह के कठोर और अपमानजनक जवाब सुनने को मिलेंगे। यह बयान बिहार की राजनीति में बिहारी अस्मिता और सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।