कुंदन कुमार, पटना। बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बहुचर्चित सृजन घोटाले की गूंज सुनाई देने लगी है। आज से ठीक नौ वर्ष पूर्व उजागर हुए इस 5500 करोड़ रुपये के वित्तीय गबन को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकारी खजाने की इस भारी-भरकम राशि को सुनियोजित तरीके से लूटा गया, लेकिन सत्ता के संरक्षण और जांच एजेंसियों की उदासीनता के कारण आज तक इस घोटाले का कोई मुकम्मल हिसाब-किताब सामने नहीं आ सका है।

​घोटाले के मुख्य बिंदु और आरोप

  • ​धन का दुरुपयोग: सरकारी खजाने के 5500 करोड़ रुपये तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चहेते नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों द्वारा अपने नजदीकियों के निजी खातों में ट्रांसफर किए गए थे।
  • ​साक्ष्यों की अनदेखी: कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के घोटालेबाजों के साथ लेनदेन और घनिष्ठता के स्पष्ट साक्ष्य सामने आए थे, इसके बावजूद जांच एजेंसियों ने मामले पर पर्दा डाल दिया।
  • ​नौ साल का खालीपन: घटना के नौ साल बीत जाने के बाद भी जनता के गाढ़े पसीने की कमाई का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला है।

​राजनीतिक बयानबाजी और तंज

​नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को लेकर सत्ताधारी गठबंधन पर कड़ा तंज कसा है। उनका कहना है कि बीजेपी की भ्रष्टाचारी रूपी गंगोत्री में डुबकी लगाकर पापियों के सारे पाप धुल जाते हैं। जनता के साथ विश्वासघात करने वाले सृजन के दुर्जन आज भी बेफिक्र होकर आराम कर रहे हैं।

निष्पक्ष जांच की आवश्यकता

इतने बड़े पैमाने पर हुए वित्तीय गबन के मामलों में पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई का अभाव जनता के मन में कई बड़े सवाल खड़े करता है। घोटालों के इस दौर में यह अत्यंत आवश्यक है कि वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष और गहराई से जांच हो, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।