० महंत चरणदास बोले— नगर परिक्रमा आत्मा की शुद्धि, समाज के कल्याण और सनातन संस्कारों का सशक्त माध्यम

अजय सैनी ,भिवानी। छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध भिवानी में इन दिनों आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिल रही है। मथुरा-वृंदावन की तर्ज पर हनुमान जोहड़ी धाम मंदिर परिवार द्वारा निकाली जा रही अढ़ाई कोसी नगर परिक्रमा ने सोमवार को अपने सफलतापूर्वक 14 माह पूर्ण कर लिए। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखते ही बन रही थी।

बालयोगी महंत चरणदास महाराज के सान्निध्य में आयोजित नगर परिक्रमा की शुरुआत सोमवार सुबह शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच हुई। जैसे-जैसे परिक्रमा आगे बढ़ी, पूरा शहर भक्ति रस में डूबता नजर आया। सैकड़ों श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए प्रभु भक्ति में लीन दिखाई दिए। भक्ति गीतों और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक और भक्तिमय बना दिया।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महंत चरणदास महाराज ने कहा कि नगर परिक्रमा केवल पैदल चलने की परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और जनकल्याण का पवित्र मार्ग है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन और वृंदावन परिक्रमा का विशेष महत्व है, उसी प्रकार भिवानी की यह अढ़ाई कोसी नगर परिक्रमा भी नगर की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए समर्पित है।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना है। जब युवा अपनी परंपराओं और संस्कारों को समझेंगे, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सांस्कृतिक जागरूकता का विस्तार होगा।

14 माह पूरे होने के इस विशेष अवसर पर भिवानी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने नंगे पैर परिक्रमा कर अपनी आस्था का परिचय दिया। पूरे मार्ग में भक्ति, उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।