अजय सैनी, भिवानी। केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और बढ़ती महंगाई को लेकर युवा कांग्रेस नेत्री एडवोकेट मुकेश ढ़ाणीमाहु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सरकार के त्याग वाले संदेशों पर पलटवार करते हुए उन्होंने इसे देश के नेतृत्व की सबसे बड़ी नाकामी करार दिया है।
एडवोकेट मुकेश ढ़ाणीमाहु ने कहा कि पिछले 12 वर्षों के शासन के बाद आज देश उस मुकाम पर खड़ा है जहां प्रधानमंत्री जनता से सोना न खरीदने, विदेश न जाने, पेट्रोल कम जलाने और यहां तक कि खाने के तेल और खाद में कटौती करने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि जब सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने में विफल हो जाती है, तो वह जनता को त्याग का पाठ पढ़ाने लगती है। ये उपदेश नहीं हैं, बल्कि इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि सरकार देश की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और कीमतों पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह नाकाम रही है।
सरकार खुद जवाबदेही से बचने के लिए आम आदमी को बता रही
उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार अपनी गलतियों और कुप्रबंधन का ठीकरा जनता के सिर फोड़ देना इस सरकार की आदत बन चुकी है। सरकार खुद जवाबदेही से बचने के लिए आम आदमी को यह बता रही है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं। मेट्रो में चलने और घर से काम करने की सलाह देना असल में ईंधन की बढ़ती कीमतों और चरमराई यातायात व्यवस्था से ध्यान भटकाने की कोशिश है। एडवोकेट मुकेश ढ़ाणीमाहु ने कड़े शब्दों में कहा कि देश को इस आर्थिक बदहाली में झोंकने के बाद अब वर्तमान नेतृत्व अपनी गरिमा खो चुका है।
क्या खाना है और कहां जाना है, वह लोकतंत्र के लिए खतरनाक
उन्होंने प्रधानमंत्री को समझौतावादी प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए कहा कि जो सत्ता जनता को यह निर्देश देने लगे कि उन्हें क्या खाना है और कहां जाना है, वह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि यदि 12 साल बाद भी अगर जनता को ही सारे बलिदान देने हैं, तो फिर सरकार की क्या उपयोगिता है? अच्छे दिनों का वादा करके सत्ता में आए लोग आज जनता की थाली और तिजोरी पर पहरा लगा रहे हैं।
अब देश चलाना इस नेतृत्व के बस की बात नहीं
अब देश चलाना इस नेतृत्व के बस की बात नहीं रही। एडवोकेट मुकेश ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि यह समय चुप बैठने का नहीं बल्कि इस उपदेशात्मक नाकामी के खिलाफ आवाज उठाने का है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अब भी विरोध नहीं किया गया तो सरकार अपनी हर विफलता का बोझ मध्यम वर्ग और गरीबों के कंधों पर डालती रहेगी।

