Jaisalmer Spy Arrest: जैसलमेर की सरहद पर बैठे दुश्मन की आंखें अब सलाखों के पीछे हैं। सीआईडी इंटेलिजेंस ने एक ऐसे शख्स को दबोचा है, जिसने पिछले दो साल से देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया। नाम है मुश्ताक अली। खारिया गांव का रहने वाला मुश्ताक, बॉर्डर के पास रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था।

कैसे बिछाया गया जाल?
मुश्ताक अली के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े थे। उसकी मौसी का बेटा नजीर पाकिस्तान में रहता है। करीब दो साल पहले नजीर ने सोशल मीडिया के जरिए मुश्ताक से संपर्क साधा। उसने मुश्ताक के दिमाग में जहर घोलना शुरू किया। उसे बहकाया गया कि भारत में एक खास समुदाय पर अत्याचार हो रहे हैं।
नजीर ने ही मुश्ताक की बात आईएसआई हैंडलर खालिद से कराई। बस, यहीं से मुश्ताक ने वतन के खिलाफ कदम उठाना शुरू कर दिया।
क्या-क्या जानकारी भेजता था मुश्ताक?
मुश्ताक जैसलमेर के उन इलाकों में घूमता था जहाँ सेना की हलचल रहती है। वह बीएसएफ का मूवमेंट, सड़कों की बनावट और पुलों की गुप्त तस्वीरें और वीडियो खींचता था। इन फाइलों को वह व्हाट्सएप के जरिए खालिद को भेजता था। इस गद्दारी के बदले उसे अपने बैंक खाते में 30 हजार रुपये मिले। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि ये पैसे भी भारत के ही खातों से ट्रांसफर किए गए।
पुलिस की सख्ती, अब खुलेगा पूरा राज
आरोपी मुश्ताक फिलहाल पांच दिन की पुलिस रिमांड पर है। जांच टीम अब यह पता लगा रही है कि उसने फोटो और वीडियो बनाने के लिए किन-किन रास्तों का इस्तेमाल किया। पुलिस को शक है कि वह बॉर्डर के और भी संवेदनशील इलाकों तक पहुंच चुका है।
सीआईडी और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब यह खंगाल रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं। जिस तरह से उसने पैसों के लिए देश की जासूसी की, उसने पूरे सीमावर्ती इलाके को चौंका दिया है। जैसलमेर के हर चौक-चौराहे पर अब इसी बात की चर्चा है कि कैसे एक अपना ही दुश्मन का मोहरा बन गया।
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