उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों में राज्य सरकार मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेगी, जिसका संभावित आकार 50 से 70 हजार करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। इस बजट में ग्रामीण विकास, नए एक्सप्रेसवे, मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी और जनसुविधाओं से जुड़ी चालू व नई योजनाओं के लिए वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों में राज्य सरकार मंगलवार को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 का अपना पहला अनुपूरक बजट पेश करने जा रही है। अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि इस अनुपूरक बजट का कुल आकार 50 हजार करोड़ से लेकर 70 हजार करोड़ रुपये तक का हो सकता है। सरकार इस बजट के माध्यम से अपनी महत्वाकांक्षी ढांचागत और जनकल्याणकारी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

ग्राम्य विकास विभाग पर रहेगा खास फोकस

इस अनुपूरक बजट में सरकार का मुख्य जोर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर रहेगा। केवल ग्राम्य विकास विभाग के लिए ही 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रबंध किए जाने की तैयारी है। इसके तहत वीबी-ग्राम जी और मनरेगा योजनाओं के लिए कुल मिलाकर 16,402.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग सदन में रखी जाएगी।

वीबी-ग्राम जी योजना के लिए 13,902.46 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है, जिसमें सर्वाधिक 5,445.85 करोड़ रुपये सामग्री मद में और 4,609.37 करोड़ रुपये सामान्य श्रमांश के लिए तय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति श्रमांश हेतु 2,675.63 करोड़ रुपये, अनुसूचित जनजाति श्रमांश के लिए 133.78 करोड़ रुपये तथा प्रशासनिक मद में 1,037.83 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। वहीं मनरेगा के तहत सामग्री मद के लिए 2,500 करोड़ रुपये की मांग शामिल है।

नई घोषणाएं और अधूरी परियोजनाएं

बजट में नए एक्सप्रेसवे के निर्माण, छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरित करने की योजना, ग्रामीण इलाकों में जनसुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और चिकित्सा-स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी के लिए विशेष धनराशि आवंटित की जाएगी।

इसके साथ ही राज्य सरकार का ध्यान पहले से स्वीकृत और अधूरी पड़ी अवसंरचनात्मक व औद्योगिक परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी रहेगा। बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास क्षेत्रों को बजट से अतिरिक्त संबल मिलने की उम्मीद है।