Rajasthan News: बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के प्रसूति वार्ड में भर्ती दो महिलाओं की महज दो घंटे के भीतर मौत हो गई। दोनों ही महिलाएं पहली बार मां बनी थीं, लेकिन ऑपरेशन के 24 घंटे भी नहीं बीते कि अस्पताल से उनके शव बाहर निकले। इस घटना से अस्पताल प्रशासन के साथ-साथ पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
पहली घटना सवनिया गांव की 21 साल की लक्ष्मी की है। अस्पताल के मुताबिक, लक्ष्मी गंभीर एनीमिया से जूझ रही थी। सीजेरियन ऑपरेशन तो हो गया, लेकिन इसके बाद उसकी तबीयत संभल नहीं सकी और उसने दम तोड़ दिया। राहत की बात बस इतनी है कि उसकी नवजात बच्ची सुरक्षित है।
ठीक ऐसी ही दूसरी घटना कानेला की 32 साल की लीला के साथ हुई। उसने बेटे को जन्म दिया था, लेकिन ऑपरेशन के करीब 24 घंटे बाद अचानक उसकी जान चली गई। अस्पताल प्रशासन ने मौत के पीछे हाई ब्लड प्रेशर को वजह माना है। उसका बेटा अभी भी एसएनसीयू (SNCU) में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
परिजनों का हंगामा, कलेक्टर ने बुलाई टीम
मौत की खबर सुनते ही परिजन भड़क गए। उन्होंने इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला बढ़ते देख जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव खुद अस्पताल पहुंचे। उन्होंने हालात का जायजा लिया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। अब 5 स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की टीम इस बात की तहकीकात करेगी कि ऑपरेशन थिएटर से लेकर रिकवरी तक क्या चूक हुई।
इस मामले में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर उन दवाओं के सैंपल लैब में भेजे हैं जो इन महिलाओं को दी गई थीं। इनमें मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन और आईवी फ्लूइड्स शामिल हैं। भीलवाड़ा के बाद बांसवाड़ा में हुई इन मौतों ने राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इन अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव कब होगा?
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