नवी शर्मा,हांसी. हरियाणा के हांसी SP विनोद कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि हरियाणा राज्य में साइबर अपराध और रंगदारी कॉल्स पर अंकुश लगाने के लिए अभेद्य मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है। यह देश का पहला ऐसा सुरक्षा प्लेटफॉर्म है, जो संदिग्ध कॉल्स और मैसेज को यूज़र तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक कर देता है।

पुलिस की इस पहल से निर्दोष लोगों की मेहनत की कमाई जरूर सुरक्षित रहेगी। पुलिस की इस पहल से आम आदमी को सीधी राहत मिलेगी।

हांसी SP विनोद कुमार की यह अपील सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को भी जिम्मेदार बनाने की कोशिश है।आपको बता दे कि यह ऐप अंतरराष्ट्रीय, वर्चुअल और अनसेव्ड नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल्स, व्हाट्सएप संदेशों और वॉयस नोट्स को स्वचालित रूप से ब्लॉक करता है।

यह ऐप संदिग्ध चैट, वॉयस नोट्स और नोटिफिकेशन को डिलीट भी कर देता है, जिससे नागरिकों को साईबर क्राइम से बचाव होता है।

हांसी जिला पुलिस साईबर क्राइम बचने के लिए जानकारी समय समय पर सांझा करती रहती है।वही आजकल बढ़ रहे साईबर क्राइम पर रोक लगाने के लिए डबल ओटीपी को भी लागू किया गया है।

60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए, बैंक-लिंक्ड लेनदेन के लिए अब डबल ओटीपी यानि अब एक बुजुर्ग के साथ साथ उसका नोमनी का भी फोन नंबर दिया जाएगा। जिससे यह OTP दोनों के फोन पर आयेगा। ताकि कोई भी बड़ा साईबर फ्रॉड होने से पहले बचा जाएं।

वही उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों और हरियाणा डीजीपी के निर्देशों के अनुसार, हरियाणा पुलिस जिला स्तर पर साइबर अपराध को रोकने के लिए अत्यधिक सक्रिय और आक्रामक रणनीति अपना रही है।

मुख्य फोकस प्री-एम्प्टिव अपराध होने से पहले रोकना और त्वरित कार्रवाई पर है। हांसी के एसपी विनोद कुमार ने साइबर फ्रॉड के मामलों को लेकर अभिभावकों से खास अपील की है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों का सही मार्गदर्शन करें, क्योंकि अक्सर घर वालों को यह अंदाजा होता है कि इतना अंधाधुन पैसा कहां से आ रहा है।

माता पिता अपने बच्चों का भविष्य भी खराब होने से बचा सकते है।समाज और परिवार की जिम्मेदारी है कि युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से रोका जाए और उन्हें सही दिशा दी जाए।

हरियाणा में साइबर क्राइम रोकने के लिए पुलिस का यह कदम मजबूत और सही दिशा में जरूर है।जब परिवार खुद जागरूक होकर बच्चों पर नजर रखते हैं और समय रहते पुलिस को जानकारी देते हैं, तो साइबर फ्रॉड जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है। इससे निर्दोष लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहती है और अपराधियों के हौसले भी कमजोर पड़ते हैं।