Dharm Desk- मई महीने में पंचक लगने वाला है, इस पंचक को लेकर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जा रही है क्योंकि यह जो पंचक को रोग पंचक माना जा रहा है. रोग पंचक 10 मई से शुरू होकर 14 मई तक रहेगा और इस बार इसकी शुरुआत रविवार से होने के कारण इसे विशेष रूप से संवेदनशील माना जा रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह समय स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. ऐसे में लोगों को इन पांच दिनों में सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है. यह भी जान लीजिए की पंचक काल होता क्या है?

पंचक वह काल होता है, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता हैं. इस दौरान ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को अशुभ प्रभाव देने वाली मानी जाती है. जिससे कार्यों में बाधा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं. लेकिन रोग पंचक को डर का नहीं बल्कि सावधानी का समय मनाना चाहिए. यदि इन पांच दिनों में सतर्कता और संयम रखा जाए, तो संभावित समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.

पंचक काल का समय

यह रोग पंचक 10 मई को दोपहर लगभग 12:00 बजे के बाद शुरू होकर 14 मई की रात 10:34 बजे समाप्त होगा. इन पांच दिनों को विशेष सावधानी जरूरी है.

क्यों माना जाता है रोग पंचक अशुभ

रविवार से शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है. मान्यता है कि इस दौरान पुरानी बीमारियां उभर सकती है. मानसिक तनाव बढ़ सकता है. शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है.

किन लोगों को रहना होगा ज्यादा सतर्क

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग, बुजुर्ग, छोटे बच्चे और मानसिक तनाव या डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्तियों को इस दौरान विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. अधिक भागदौड़ और लंबी यात्रा करने वालों को भी सावधानी बरतनी चाहिए.

इन कामों से करें परहेज करना जरूरी

पंचक में विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण कार्य और अन्य मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए. दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी या ज्वलनशील वस्तुओं की खरीदारी और नया फर्नीचर लेना भी अशुभ माना गया है.

कैसे रखें खुद को सुरक्षित

इस दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखें. अनावश्यक विवाद से बचें. स्वास्थ्य संबंधी लक्षण नजर आते ही डॉक्टर से संपर्क कर. साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ और सूर्य को अर्घ्य देना लाभकारी माना गया है.