अनमोल मिश्रा, सतना। सतना में नहीं थम रहा खून का सौदा, सतना से लेकर रीवा तक खून की खरीद फरोख्त का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, मरीज के परिजनों से ब्लड दिलाने के नाम पर हजारों रुपए वसूले जा रहे हैं। आलम यह है कि एक यूनिट ब्लड के लिए 5 से 7 हजार रुपए तक मांगे जा रहे हैं। सतना जिला अस्पताल में एचआईवी कांड के बाद एक बार फिर खून के सौदागर सक्रिय हो गये हैं। सतना में खून के दलालों के वीडियो सामने आने के बाद पूरे सिस्टम में हड़कंप मचा हुआ है, प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
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खून की खरीद फरोख्त के इस नेटवर्क में अस्पताल के कर्मचारी, सफाईकर्मी, एंबुलेंस ड्राइवर, और पान ठेले वाले तक शामिल हैँ, सूत्रों के अनुसार कुछ निजी दलाल और कथित एजेंट जरूरतमंद मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर रक्त उपलब्ध कराने के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। बताया जा रहा है कि अस्पतालों और ब्लड बैंक के आसपास सक्रिय कुछ लोग गरीब युवाओं को पैसों का लालच देकर बार-बार रक्तदान करवाते हैं, जबकि जरूरतमंद परिवारों से हजारों रुपये तक की मांग की जाती है। इससे न केवल स्वास्थ्य नियमों की अनदेखी हो रही है बल्कि मानवता भी शर्मसार हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह नेटवर्क केवल सतना तक सीमित नहीं है, बल्कि रीवा जिला में भी फैला हुआ है। जहाँ कई बार मरीजों के परिजनों को इमरजेंसी ब्लड के नाम पर ब्लैक मार्केटिंग का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों की मजबूरी को कारोबार बनाने वालों पर लगाम लग सके।
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जब इस मामले पर सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि खबर संज्ञान में आई है कि कुछ अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा इस तरह का कार्य किया जा रहा है कि जरूरतमंदों को बरगला कर ब्लड दिलाया जा रहा है, जिस पर सिविल सर्जन से रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें कुछ रीवा के निजी ब्लड बैंक शामिल हैँ, जिस पर रीवा के अधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगा गया है, उनसे विस्तृत जानकारी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

