अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्यप्रदेश सरकार जहां समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले में इसकी जमीनी तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आ रही है। 15 अप्रैल से रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूं खरीदी शुरू होने का दावा किया गया था, लेकिन पहले ही दिन व्यवस्थाएं दम तोड़ती दिखीं और कई खरीदी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा।

ग्राउंड स्तर पर पड़ताल में जिले के बुढ़ार खरीदी केंद्र सहित जिले के कई केंद्रों पर ताले लटके मिले। समय पर केंद्र नहीं खुल रहे ,  न तो किसान मौजूद थे और न ही कोई कर्मचारी। जिन केंद्रों पर व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहां मूलभूत सुविधाएं तक नदारद रहीं। शासन के निर्देशानुसार किसानों के लिए छाया हेतु टेंट, पीने के पानी की व्यवस्था, कंप्यूटर और ऑनलाइन सिस्टम अनिवार्य हैं, लेकिन हकीकत में ये सभी व्यवस्थाएं कहीं नजर नहीं आईं। केंद्र परिसरों में फैली गंदगी और अव्यवस्था यह दर्शाती है कि खरीदी शुरू होने से पहले जरूरी तैयारियां पूरी नहीं की गईं। 

जिले में किसानों की कम उपस्थिति के पीछे भी ठोस कारण सामने आ रहे हैं। पहला, इस समय अधिकांश किसान गेहूं की कटाई में व्यस्त हैं, जिससे वे खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे। दूसरा, जानकारों के अनुसार शहडोल में गेहूं की पैदावार अन्य जिलों की तुलना में कम होती है, इसलिए किसान इस फसल में अपेक्षाकृत कम रुचि रखते हैं। यही वजह है कि स्लॉट बुकिंग की रफ्तार भी बेहद धीमी है. ,केंद्र प्रभारियों का कहना है कि अभी तक बहुत कम किसानों ने स्लॉट बुक कराए हैं। 

जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन पटेल के अनुसार, इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिस पर राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इस प्रकार किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाएगा। जिले में 9,526 किसानों ने पंजीयन कराया है, लेकिन 13 अप्रैल तक केवल 418 किसानों ने ही स्लॉट बुकिंग की है, जो कि बेहद कम है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना पूरी तैयारी के ही खरीदी प्रक्रिया शुरू कर दी गई, या फिर स्थानीय परिस्थितियों और किसानों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया। फिलहाल खरीदी केंद्रों की सुस्ती और अव्यवस्थाएं प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। 

वहीं इस मामले में खाद्य आपूर्ति अधिकारी विपिन पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में गेहूं के प्रति किसानों की रुचि कम है यही कारण है कि गेहूं की खेती कम होती है। इसी के चलते स्लॉट भी बुक नहीं हुए है, जिले के सामतपुर में बस गेहूं का उत्पादन अधिक है, रही बात बुढार की तो बुढार में केशवाही, झिकबिजरी,राजमोहन में  किसानों ने अभी तक स्लॉट बुक नहीं कराया है। 

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