यमुनानगर। बरसान गांव की 82 वर्षीय बीरबती कांबोज ने यह साबित कर दिया कि जीवन का उद्देश्य केवल जीना ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी समाज के काम आना है। उम्र के इस पड़ाव पर उन्होंने देहदान और नेत्रदान का ऐसा निर्णय लिया, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया।
उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर को श्री सिद्धिविनायक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा, जहां मेडिकल छात्र मानव शरीर की संरचना का अध्ययन कर सकेंगे।
अंतिम विदाई के दौरान माहौल हुआ भावुक
इसके साथ ही उनकी आंखें सिविल अस्पताल यमुनानगर के नेत्र बैंक को दान की गईं, जिससे दो लोगों की आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद जगी है।
अंतिम विदाई के दौरान भावुक माहौल देखने को मिला। उनकी बेटियों और पुत्रवधुओं ने अर्थी को कंधा देकर समाज को एक मजबूत संदेश दिया कि बेटा और बेटी दोनों समान रूप से जिम्मेदारियां निभा सकते हैं।
मृत्यु अंत नहीं, बल्कि सेवा की नई शुरुआत
परिजनों के अनुसार, बीरबती ने वर्षों पहले ही देहदान और नेत्रदान का संकल्प लिया था। यह निर्णय उन्होंने पूरी जागरूकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से लिया था।गांव के सरपंच कुलदीप सिंह ने कहा कि बीरबती का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने यह संदेश दिया कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि सेवा की नई शुरुआत भी हो सकती है।

