मणिपुर के राहत शिविरों में हुई संदिग्ध मौतों पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को सभी 25 संदिग्ध मौतों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया. शीर्ष कोर्ट ने साथ यह भी आदेश दिया है कि वे इन मौतों की जांच, आपराधिक कार्रवाई शुरू करने और वहां रहने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दें. 

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के राहत कैंपों में अप्राकृतिक मौतों और यौन उत्पीड़न पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई.

मणिपुर के राहत शिविरों में संदिग्ध मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने राज्य के शीर्ष अधिकारी को चेतावनी देते हुए पूछा कि जस्टिस गीता मित्तल कमेटी द्वारा दी गई जानकारी पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए.

अदालत ने मुआवजे की राशि और पोस्टमार्टम से जुड़े मामलों पर भी राज्य से जवाब मांगा है. सभी अप्राकृतिक मौतों में एफआईआर, तेज जांच तथा राहत शिविरों में रह रहे विस्थापितों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी पूछा कि 34 मौतों में से केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों किया गया.

मामला 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई से संबंधित है. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का भी जिक्र किया.

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के एडवोकेट जनरल से  सख्त लहजे में कहा, ‘अपने मुख्य सचिव से कहिए कि अदालत को आदेश पारित करने के लिए मजबूर न करें. राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोगों की 25 अप्राकृतिक मौतों को लेकर जो जानकारी मांगी थी, उस पर क्या कार्रवाई हुई. 

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