इमरान खान, खंडवा। कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं, इसका एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। जवानी के दिनों में चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हुआ एक शातिर आरोपी अपने बुढ़ापे (61 साल की उम्र) में जाकर पुलिस के हत्थे चढ़ा है। आरोपी पिछले 36 साल से अपनी पहचान छिपाकर फरारी काट रहा था, लेकिन आखिरकार पुलिस की सूझबूझ और फिल्मी जाल के आगे उसकी चालाकी धरी की धरी रह गई।

वर्ष 1989 में की थी चोरी, 25 की उम्र में मिली थी जमानत

दरअसल मामला वर्ष 1989 का है, जब कोतवाली क्षेत्र में कालू नाम के एक युवक ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। तब उसकी उम्र महज 25 वर्ष थी। वारदात के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया था, जहां से उसे जमानत मिल गई थी। जमानत पर बाहर आते ही कालू ऐसा गायब हुआ कि फिर कभी कोर्ट या थाने नहीं पहुंचा। इस हाई-प्रोफाइल लापरवाही के कारण इस केस की फाइल पर पिछले 36 सालों से धूल जमी हुई थी।

गांव बदला, पहचान छिपाई

कालू ने पुलिस से बचने के लिए अपना मूल गांव ‘बेड़ियाव’ पूरी तरह से छोड़ दिया और रुस्तमपुर इलाके में जाकर रहने लगा, ताकि कोई उसे पहचान न सके। लंबे समय बाद जब कोर्ट ने इस पेंडिंग फाइल को खोला, तो इसी साल जनवरी में आरोपी के खिलाफ दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने मुखबिरों का जाल बिछाया और पता चला कि आरोपी रुस्तमपुर में छुपा हुआ है।

खेत में निंदाई करते हुए दबोचा

आरोपी कालू को पकड़ने के लिए पुलिस ने फिल्मी योजना बनाई। हेडकांस्टेबल रफीक खान ने कांस्टेबल अनुराग और पंकज साहू के साथ मिलकर ऑपरेशन शुरू किया। चूंकि आरोपी खेतों में काम कर रहा था, इसलिए पुलिसकर्मी खुद ‘किसान’ का भेष बनाकर रुस्तमपुर के खेतों में पहुंच गए। वहां कालू निंदाई (खरपतवार हटाने) कर रहा था। पुलिसकर्मियों ने उससे निंदाई काम कराने के बहाने बातचीत शुरू की और जैसे ही भरोसा हुआ कि यही कालू है, उसे मौके पर ही दबोच लिया। 36 साल बाद हुई इस गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में भी राहत है। आरोपी को दोबारा सलाखों के पीछे भेज दिया।

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