सत्यपाल सिंह राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2024-25 की मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। लोक सेवा आयोग का दावा रहता है कि उत्तरपुस्तिकाओं की जांच दो स्तरों- एक्जामिनर और हेड एक्जामिनर पर होती है. लेकिन सूचना के अधिकार (RTI) के तहत वर्ष 2024-25 के मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में बरती गई लापरवाही ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए मिली उत्तरपुस्तिकाओं ने साफ कर दिया है कि सही जवाब पर कम अंक, गलत जवाब पर अंक और कही-कही बेमतलब लिखने पर भी अच्छे नंबर दिए गए हैं. इसके साथ ही आयोग का कई स्तरों पर जांच का दावा खोखला साबित हो रहा है।

दस्तावेजों के अनुसार, बुद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण वाले सवाल में गृहत्याग, घोड़े का प्रतीक और ज्ञान प्राप्ति तीनों बिंदु बिल्कुल एक जैसे लिखे गए, फिर भी एक को 0.5 और दूसरे को 1.5 अंक दिया गया है। घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 2 में व्यथित व्यक्ति केवल महिला है। सही जवाब महिला लिखने पर 0.5 अंक मिले, लेकिन गलत जवाब पुरुष लिखने वाले को भी उतने ही अंक दे दिए गए।

और भी चौंकाने वाले बात ये है कि छत्तीसगढ़ में होम रूल लीग की स्थापना का सही साल 1917 और रायपुर का जिक्र करने वाले को 2.5 अंक मिले लेकिन जिसने गलत साल 1923 लिखकर स्वराज पार्टी की बात कर दी, उसे भी 2.5 ही दिए गए है।

माता राजिम तेलिन वाले सवाल में सही तथ्यों पर 3.5 अंक मिले, जबकि पूरी तरह गलत जवाब जनजातीय देवी और कोंडागांव/केशकाल का जिक्र पर 1.5 अंक दिया गया है. हद तो तब हो गई जब एक अभ्यर्थी ने पूरी कॉपी में सिर्फ भोग लगाती थी, भोग लगा रही थी, भोग लगाना चाहिए. जैसी निरर्थक बातें लिखकर 4.5 अंक हासिल कर लिए, जो सही जवाब देने वालों से भी ज्यादा है।

भाषा के पेपर में भी भारी विषमता दिखी है. अंग्रेजी में आधी कॉपी खाली छोड़ने वाले को 7.5 अंक मिले, जबकि प्रामाणिक और बिंदुवार जवाब देने वाले को महज 4.5 से 5 अंक मिला है. अभ्यर्थी पूछ रहे हैं दो स्तरों एग्जामिनर और हेड एग्जामिनर पर जांच का दावा करने वाले आयोग के विशेषज्ञों को क्या Article जैसे बुनियादी व्याकरण का भी ज्ञान नहीं है?

ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं. इसके पहले भी 2021-22 बैच में पेपर खरीद-फरोख्त का मामला लल्लूराम डॉट ने उजागर किया था। उसमें सीबीआई जांच चल रही है, और तत्कालीन अध्यक्ष सहित कई लोग जेल में हैं। इतिहास दोहराया जा रहा है क्या?

अभ्यर्थियों की मांग साफ है। 21 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले इंटरव्यू को स्थगित किया जाए। सभी प्रभावित उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन और पुनरीक्षण हो। स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। लापरवाही बरतने वाले परीक्षकों और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि उत्तरपुस्तिकाएं पहले की तरह निशुल्क और तुरंत उपलब्ध कराई जाएं।

2024 से पहले कांग्रेस शासन में मुख्य परीक्षा की कॉपी निशुल्क ऑनलाइन मिल जाती थी। अब 500-600 रुपये शुल्क लेकर दी जाती है। आरटीआई के बावजूद रिजल्ट से पहले कॉपी क्यों नहीं मिलती?

CGPSC वाले इस साल के पेपर का भी पुनर्मूल्यांकन करें या कम से कम रिजल्ट से पहले उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराए. लोक सेवा आयोग जैसी संस्था में इतनी बड़ी गलती या साजिश सहन नहीं की जा सकती। निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग अब सिर्फ अभ्यर्थियों की नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की है। क्योंकि जब चयन प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में हो, तो योग्य उम्मीदवारों का भरोसा कैसे टिकेगा?

वही इस मामले में CGPSC का पक्ष जानने के लिए भी आयोग के कार्यालय पहुँचे, तो कोई भी अधिकारी आपत्तियों पर जवाब देना तो दूर संवाददाता से मिलना तक नहीं चाहा. गार्ड लगाकर रिसेप्शन में ही अंदर जाने से रोक दिया गया. दूसरे दिन आयोग के जिम्मेदारों ने सुरक्षा बढ़ा दी। दूसरे दिन संवाददाता पहुंचा तो गेट पर तैनात पुलिस बल ने अंदर जाने से ही रोक दिया। यही नहीं आयोग के ज़िम्मेदार अधिकारियों को कॉल किया गया, सवाल मेसेज किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।

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