चंडीगढ़। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर की सीमाओं को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर मंगलवार को विराम लग गया है। दिल्ली में आयोजित एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की अहम बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है कि फिलहाल एनसीआर के दायरे में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इससे पहले काफी समय से यह चर्चा चल रही थी कि हरियाणा के पांच जिलों को एनसीआर की सीमा से बाहर किया जा सकता है, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है।

केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक, सीएम सैनी ने दी जानकारी

यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में आयोजित हुई थी। बैठक खत्म होने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मीडिया को फैसले की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरियाणा का जो क्षेत्र पहले एनसीआर में आता था, वह आगे भी वैसा ही बना रहेगा। आपको बता दें कि हरियाणा के कुल 23 जिलों में से 14 जिले इस दायरे के अंतर्गत आते हैं। अगर सीमाएं घटाने का फैसला लिया जाता, तो करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जिले इस लिस्ट से बाहर हो जाते।

राजस्थान के विरोध के कारण नहीं बदला दायरा

सूत्रों के मुताबिक, एनसीआर का दायरा कम होने का सबसे बड़ा नुकसान पड़ोसी राज्य राजस्थान को उठाना पड़ता। अगर नया बदलाव लागू होता, तो राजस्थान का केवल भिवाड़ी इलाका ही एनसीआर का हिस्सा रह जाता, जबकि अलवर और भरतपुर जैसे बड़े जिले इस वीआईपी जोन से बाहर हो जाते। इसी वजह से राजस्थान सरकार इस बदलाव के पक्ष में बिल्कुल नहीं थी और उन्होंने इसका विरोध किया था।

बनेंगे चार आधुनिक नमो सिटी, वाहनों को लेकर भी बनी योजना

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि एनसीआर के भीतर चार बेहद आधुनिक नमो सिटी विकसित करने की योजना है। हालांकि, ये आधुनिक शहर किन जगहों पर बसाए जाएंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है। इसके लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है जो सभी संबंधित राज्यों से सुझाव मांगेगी। इसके साथ ही रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी आरआरटीएस को करनाल की तरफ बढ़ाने और मानेसर रूट पर काम तेज करने को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में बीएस-6 श्रेणी से नीचे वाले पुराने वाहनों को लेकर एक नई परिवर्तन योजना तैयार की गई है। प्लानिंग बोर्ड की अगली बैठक अब दिसंबर महीने में होना तय हुई है।