Dharm Desk – महादेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए सावन का समय सबसे शुभ होता है। इस दौरान की गई छोटी सी पूजा भी मनुष्य के जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां दूर हो जाती है। यदि लंबे समय से आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति या कार्यों में आ रही समस्याओं से परेशान हैं। तो किसी भी दिन किया जाने वाला यह खास अभिषेक आपकी सोई हुई किस्मत को चमका सकता है।

इस अभिषेक की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसके लिए आपको किसी कठिन कर्मकांड या भारी पूजा सामग्री की जरूरत नहीं होती। बहुत साधारण और सहज रूप से उपलब्ध सामान से किया गया यह अभिषेक महादेव की असीम अनुकंपा प्राप्त करवाता है।

अभिषेक के लिए सामग्री, पूजा विधि

  1. एक बेलपत्र जो कहीं से भी कटा-फटा या खंडित न हो।
  2. चने की दाल के 5 दाने।
  3. चावल 5 साबुत दाने।
  4. शुद्ध शहद अभिषेक एवं अर्पण के लिए।

सुबह जल्दी उठकर नहा ले और साफ कपड़े पहन कर उसके बाद अपने घर के मंदिर या पास के शंकर मंदिर में पूरी श्रद्धा के साथ जाएं।अब सबसे पहले अपने हाथ की हथेली में 5 दाने चने की दाल और 5 दाने चावल के रखें। इसके ऊपर एक सुंदर और साफ बेल पत्र रखें।

अब इन सभी चीजों को एक साथ पूरी श्रद्धा भाव से शिवलिंग के ऊपर चढ़ा दें। इसके बाद बेलपत्र के ऊपर थोड़ा सा शुद्ध शहद ढारते हुए शिवलिंग का अभिषेक करें।

अभिषेक करते समय मन ही मन भगवान शंकर का स्मरण करें और अपनी मनोकामना पूरी करने की शंकर जी से प्रार्थना करें।
किसी भी दिन किए जाने वाले इस विशेष अभिषेक का अपना एक अलग ही आध्यात्मिक महत्व है।जिसमें बेलपत्र को त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का प्रतीक माना जाता है। इसे चढ़ाने से महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

चावल सुख-समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक है। जिससे जीवन की दरिद्रता दूर होती है। चने की दाल गुरु ग्रह से संबंधित मानी जाती है और जीवन में स्थायित्व व उन्नति लाती है। शहद की मिठास जीवन के कलेशों को समाप्त कर पारिवारिक मधुरता और स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है।

अभिषेक करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  1. चावल का कोई भी दाना टूटा हुआ नहीं होना चाहिए।
  2. बेलपत्र साफ-सुथरा हो और उसमें छेद न हों।
  3. पूरी पूजा के दौरान मन को शांत रखें और भगवान शंकर में पूर्ण विश्वास बनाए रखें।
  4. इस सरल और अचूक उपाय को अपनाकर आप भी अपने जीवन में सुख शांति और समृद्धि का आगमन कर सकते हैं।
  5. पूजा के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय श्रद्धा और शांत मन से भगवान शंकर का स्मरण करें।