कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में मानसिक तनाव, अवसाद और भावनात्मक संकट से जूझ रहे हजारों लोगों के लिए अब एक फोन कॉल ही बड़ी राहत बनती जा रही है। राज्य सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन पिछले कुछ वर्षों में ऐसी “जीवनरेखा” बनकर उभरी है, जहां लोग बिना झिझक अपनी मानसिक परेशानियां साझा कर रहे हैं। नवंबर 2022 में शुरू हुई इस सेवा पर अब तक 16 हजार से ज्यादा कॉल आ चुकी हैं, जो यह दिखाती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है।

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक नागरिक टोल-फ्री नंबर 14416 और 1-800-891-4416 पर कॉल कर मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और मनोसामाजिक सहायता ले सकते हैं। खास बात यह है कि यह सेवा पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है, जिससे लोग खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर पा रहे हैं। हेल्पलाइन पर आने वाले ज्यादातर मामलों में चिंता, अवसाद, परीक्षा का तनाव, नशे की समस्या, शोक और आत्महत्या जैसे विचार शामिल हैं।

हरियाणा सरकार ने अब इस हेल्पलाइन को 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से भी जोड़ दिया है। यानी अगर किसी व्यक्ति से जुड़ी आत्महत्या या मानसिक संकट की कॉल 112 पर आती है, तो उसे तुरंत टेली-मानस के प्रशिक्षित काउंसलरों तक ट्रांसफर किया जाता है ताकि समय रहते मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा सके। स्वास्थ्य विभाग इसे राज्य के इमरजेंसी और पब्लिक हेल्थ सिस्टम में एक बड़ा बदलाव मान रहा है।

दिलचस्प बात यह भी है कि इस पहल का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में दिखाई दिया है। आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश कॉल गांवों और छोटे शहरों से आई हैं, जो यह संकेत देती हैं कि अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहीं। पिछले एक साल में ही करीब 10 हजार कॉल आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि टेली-मानस केवल हेल्पलाइन नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज की सोच बदलने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर नागरिक तक सस्ती, समय पर और गोपनीय मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हो।

हेल्पलाइन पर काम कर रही 20 प्रशिक्षित काउंसलरों की टीम लगातार लोगों को भावनात्मक सहायता, संकट हस्तक्षेप और जरूरी मार्गदर्शन दे रही है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बढ़ती कॉल्स इस बात का संकेत हैं कि अब लोग मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय मदद मांगने के लिए आगे आ रहे हैं। आने वाले समय में सरकार जागरूकता अभियान और टेली-काउंसलिंग नेटवर्क को और मजबूत करने की तैयारी में है ताकि दूरदराज गांवों तक भी यह सहायता आसानी से पहुंच सके।