इदरीश मोहम्मद, पन्ना। उत्तर वन मंडल में तेंदुपत्ता तोड़ने जंगल गई महिलाओं पर एक नहीं बल्कि तीन खूंखार भालुओं ने हमला कर दिया। इस दौरान घने जंगल में एक 19 साल की बेटी की ऐसी जांबाजी देखने को मिली, जिसने मां को मौत के मुंह से वापस खींच लिया।
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तेंदूपत्ता तोड़ते समय अचानक हुआ हमला
मिली जानकारी के अनुसार देवेंद्रनगर रेंज के अंतर्गत आने वाले डूंगरा पहाड़ पर महिलाएं तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल के भीतर गई थीं। इसी दौरान झाड़ियों के पीछे छिपे तीन खूंखार भालुओं ने बिंदा राय नाम की महिला पर अचानक हमला कर दिया। भालुओं के चंगुल में फंसी महिला की चीख-पुकार से सब सहम गए।
मां के लिए ‘शेरनी’ बनी 19 साल की बेटी
मां को मौत के मुंह में फंसा देख बिंदा राय की 19 वर्षीय जांबाज बेटी ईसा राय बिना अपनी जान की परवाह किए उन खूंखार भालुओं से सीधे भिड़ गई। इस भयानक और खूनी संघर्ष में बेटी ईसा भी बुरी तरह लहूलुहान हो गई लेकिन उसने कदम पीछे नहीं हटाए।
मौसी ने भी दिखाई हिम्मत
मां-बेटी को भालुओं से संघर्ष करता देख पास ही मौजूद मौसी पूर्णिमा भी हिम्मत जुटाकर हाथ में पत्थर लेकर चीखते हुए भालुओं पर टूट पड़ीं। तीन महिलाओं के इस अदम्य साहस और रौद्र रूप के आगे आखिरकार खूंखार भालुओं के हौसले पस्त हो गए और वे दुम दबाकर घने जंगल की ओर भाग खड़े हुए।
समय पर नहीं पहुंची 108, ऑटो से लेकर पहुंचे अस्पताल
इस हैरतअंगेज बहादुरी के बाद सिस्टम की एक बेहद शर्मनाक और अमानवीय तस्वीर भी सामने आई। खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान मां-बेटी जंगल में तड़पती रहीं। परिजनों द्वारा बार-बार फोन किए जाने के बावजूद भी समय पर 108 एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। आखिरकार गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन निजी ऑटो की व्यवस्था कर घायलों को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है।
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ग्रामीणों में भारी आक्रोश
वन विभाग की इस कथित लापरवाही और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा 108 एम्बुलेंस के समय पर न पहुंचने को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली इलाकों में अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से सुरक्षा और रेस्क्यू के पुख्ता इंतजाम नहीं रहते।

