पुरी: ओडिशा के पुरी में आज पवित्र ‘भौंरी’ यात्रा (Bhaunri Jatra) का आयोजन हो रहा है. महाप्रभु जगन्नाथ की 21 दिवसीय बाहर चंदन यात्रा के इस महत्वपूर्ण अवसर पर रथ निर्माण के अगले चरण यानी ‘चक-अख डेरा’ (पहिए और धुरी जोड़ने) की पारंपरिक नीति संपन्न की जाएगी.

क्या है ‘चक-अख डेरा’ नीति?

  • परंपरा के अनुसार, रथ निर्माण स्थल यानी ‘रथखला’ में तीनों रथों के पहियों को उनकी धुरी (Axle) से जोड़ा जाता है.
  • श्रीमंदिर में सुबह की पूजा और ‘सकाल धूप’ के बाद, पुजारी (पूजापंडा सेवक) भगवान का ‘आज्ञामाला’ (दिव्य अनुमति) लेकर रथखला पहुंचेंगे.
  • इसके बाद, तीनों बाड़ों (भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों) के लिए दो-दो पहिए और एक-एक धुरी को विधिवत स्थापित किया जाएगा.
  • इस रस्म के दौरान ‘भोई’ सेवकों द्वारा ‘हरिबोल’ के जयघोष के साथ इस कार्य को संपन्न किया जाता है.

नरेन्द्र पुष्करिणी में विशेष उत्सव

आज चंदन यात्रा का समापन चरण होने के कारण नरेन्द्र पुष्करिणी (पवित्र तालाब) में महाप्रभु की नौका विहार यानी ‘चापा’ यात्रा बेहद खास होगी. भगवान मदनमोहन, राम-कृष्ण और पंच पांडव विशेष नौकाओं में सवार होकर जलक्रीड़ा करेंगे. भौंरी के दिन तालाब में 21 घेरे (rounds) लगाने की परंपरा है.

प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा

लाखों भक्तों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं. सुरक्षा कारणों से उत्सव के दौरान पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. श्रीमंदिर, रथखला और नरेन्द्र पुष्करिणी के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तालाब के पास अग्निशमन दल और लाइफगार्ड्स की तैनाती की गई है. श्रीक्षेत्र आज पूरी तरह भक्तिमय है और महाप्रभु के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.