अनूप दुबे, कटनी। मध्य प्रदेश का कटनी जिला इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाला शाहडार का घनघोर जंगल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ अब जंगल के राजा ‘वनराज’ की चहलकदमी के लिए सुर्खियों में है। टेसू रिसोर्ट के पास लगातार बाघ की दस्तक से इलाके में पर्यटकों का तांता लगा हुआ है लेकिन इस उत्साह के बीच कुछ खतरे भी मंडरा रहे हैं।

शिव मंदिर में सिर रगड़ने का वीडियो हुआ था वायरल, रोजाना पहुंच रहीं दर्जनों गाड़ियां

शाहडार के जंगल में बाघ की मौजूदगी की चर्चा तब शुरू हुई थी, जब कुछ समय पहले एक शिव मंदिर में बाघ द्वारा सिर रगड़ने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद से ही बीते 3-4 महीनों से बाघ एक निश्चित दायरे में लगातार देखा जा रहा है। अब आलम यह है कि बाघ और तेंदुए की एक झलक पाने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंच रहे हैं। रोजाना करीब 60 से अधिक चार पहिया वाहन पर्यटकों को लेकर शाहडार के जंगलों के चक्कर काट रहे हैं।

आपको बता दें कि शाहडार के इस जंगल में बाघ और तेंदुए के अलावा भालू, हिरण, मोर, नीलगाय, बंदर और विलुप्त हो रही प्रजाति का ‘पैंगोलिन’ भी पाया जाता है।

जंगल में आए दिन लग रही आग से वन्यजीवों की जान आफत में

एक तरफ जहां वन विभाग लगातार गश्त करने और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिस संवेदनशील इलाके में बाघ और तेंदुए लगातार दिखाई दे रहे हैं वहां के जंगलों में आए दिन आग लग रही है। सूखी पत्तियों और पेड़ों में सुलगती यह आग न सिर्फ कीमती वनस्पति को नष्ट कर रही है बल्कि यहां रहने वाले दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो रही है।

कुसेरा नाका मार्ग पर जानलेवा गड्ढ से हादसे का डर

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच स्थानीय बुनियादी ढांचा भी दम तोड़ रहा है। रिसोर्ट से कुसेरा नाका की तरफ जाने वाले मुख्य मार्ग पर, पुलिया के ठीक पास एक बहुत बड़ा और गहरा गड्ढा हो गया है। जिस रफ्तार और तादाद में यहां सैलानियों की गाड़ियां दौड़ रही हैं, उसे देखते हुए इस गड्ढे के कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। वन्य प्राणी प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए सड़क के इस गड्ढे को तुरंत सुधारा जाए।

प्रशासन से सुरक्षा और सुधार की गुहार

शाहडार जंगल में बढ़ रहे ईको-टूरिज्म की संभावनाओं के बीच अब व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की भारी जरूरत है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि अगर समय रहते जंगल की आगजनी पर काबू नहीं पाया गया और जर्जर रास्तों को ठीक नहीं किया गया, तो सैलानियों के साथ-साथ यहां के वन्यजीवों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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