भिवानी के गांव खावा में शहीद किसान नेता मंगल सिंह खरेटा और चौ. मांगेराम मलिक को याद किया गया। इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया।
अजय सैनी, भिवानी। महिला पहलवान आंदोलन के दौरान शहीद हुए भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक सदस्य और किसान आंदोलन के पुरोधा मंगल सिंह खरेटा की पुण्यतिथि पर गांव खावा में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहीद मंगल सिंह खरेटा के समाधि स्थल और हरफूल जुलानी वाला गौशाला परिसर में संपन्न हुआ, जिसमें क्षेत्र के किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भारी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर स्व. खरेटा के गुरु चौधरी मांगेराम मलिक को भी याद किया गया और उनकी स्मृति में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि मोनी बाबा तुरंतनाथ महाराज ने उपस्थित जनसमूह को महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
महापुरुषों की याद में पौधारोपण संकल्प
कार्यक्रम के दौरान दोनों महान किसान नेताओं की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए ग्रामीणों और युवा कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में पौधे लगाए। युवाओं ने न केवल पौधारोपण किया, बल्कि उन पौधों के बड़े होने तक उनकी पूर्ण सुरक्षा और देखभाल का अटूट संकल्प भी लिया। मुख्य अतिथि मोनी बाबा तुरंतनाथ महाराज ने कहा कि महापुरुषों की याद में प्रकृति की सेवा करना ही उनके प्रति सच्ची और सार्थक श्रद्धांजलि है। भगत सिंह युवा क्लब पटौदी के प्रधान कुलदीप जटासरा ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि किसान नेताओं के दिखाए गए सेवा और संघर्ष के रास्ते पर चलकर ही देश की उन्नति संभव है।
किसान आंदोलन की दो मजबूत दीवारें
ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के युवा प्रदेश अध्यक्ष युद्धवीर मंगल सिंह खरेटा और गौसेवक चत्तर सिंह छिमी ने कहा कि शहीद मंगल सिंह खरेटा और चौधरी मांगेराम मलिक देश के किसान आंदोलन की दो सबसे मजबूत दीवारें थे। भारतीय किसान यूनियन की नींव रखने से लेकर किसानों के हक की आवाज बुलंद करने तक, उनका जीवन संघर्ष की मिसाल रहा है। उन्होंने बताया कि जब भी देश के अन्नदाताओं या बेटियों के सम्मान पर संकट आया, ये नेता हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। इस श्रद्धांजलि सभा में ईश्वर बागनवाला, अनिल बागनवाला, रामवीर फौजी और चत्तर सिंह झुल्ली सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने चित्रों पर पुष्प अर्पित कर शहीदों को नमन किया और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का प्रण लिया।

