कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। ग्वालियर की विशेष CBI अदालत ने 2013 की पुलिस भर्ती परीक्षा के चर्चित फर्जीवाड़े में बड़ा फैसला सुनाया है। दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने और सॉल्वर बैठाकर भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने के मामले में कोर्ट ने अमितेश कुमार और विपिन कुमार को दोषी ठहराया है। अदालत ने माना कि अमितेश ने विपिन कुमार की जगह परीक्षा देकर सॉल्वर की भूमिका निभाई, जबकि विपिन ने उसे अपनी जगह परीक्षा में बैठाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश की। हालांकि दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़ी IPC की धारा 467, 468 और 471 के आरोप दोनों के खिलाफ साबित नहीं हुए, इसलिए इन धाराओं में दोनों को दोषमुक्त किया गया है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में 2 और 3 साल के सश्रम कारावास के साथ जुर्माने की सजा सुनाई है।
दरअसल, मामला 9 मार्च 2014 का है। गुना जिले के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 आयोजित की जा रही थी। परीक्षा के दौरान एक परीक्षार्थी की गतिविधियां संदिग्ध नजर आईं। उसके हस्ताक्षर और लिखावट रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे, जबकि प्रवेश पत्र पर लगी तस्वीर को लेकर भी संदेह सामने आया। पूछताछ में उसकी पहचान अमितेश राजपूत के तौर पर हुई। इसके बाद गुना कैंट थाने में मामला दर्ज हुआ और जांच आगे बढ़ी। CBI की जांच में सामने आया कि अमितेश कुमार ने वास्तविक अभ्यर्थी विपिन कुमार की जगह परीक्षा दी थी।
परीक्षा में साजिश और धोखाधड़ी साबित
आरोप था कि विपिन को पुलिस भर्ती परीक्षा में चयनित कराने के लिए अमितेश को सॉल्वर बनाकर परीक्षा केंद्र भेजा गया। अमितेश ने परीक्षा केंद्र पर खुद को विपिन के तौर पर पेश किया। परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठा लगाने की कार्रवाई भी सामने आई। जांच के दौरान अमितेश के हस्तलेख और हस्ताक्षर के नमूने लिए गए और वैज्ञानिक जांच से जुड़े साक्ष्यों को कोर्ट के सामने रखा गया। CBI की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अदालत ने माना कि अमितेश के खिलाफ साजिश और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे साबित किए हैं।
इन धाराओं में दोषमुक्त
वहीं कोर्ट ने विपिन कुमार के खिलाफ भी अमितेश के साथ मिलकर साजिश रचने और अपनी जगह सॉल्वर बैठाने का आरोप प्रमाणित माना। यानी कोर्ट के फैसले में यह स्पष्ट हुआ कि एक आरोपी ने परीक्षा में सॉल्वर की भूमिका निभाई, जबकि दूसरे ने अपनी जगह उसे परीक्षा में बैठाया। हालांकि अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 467, 468 और 471 के आरोप साबित नहीं कर सका। लिहाजा अदालत ने इन धाराओं में दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, लेकिन साजिश, धोखाधड़ी और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों में अदालत ने दोनों को दोषी माना। ऐसे में अमितेश कुमार को धारा 120-B में 2 साल, धारा 419 में 3 साल, धारा 420 में 3 साल और धारा 465 में 2 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
जुर्माना न देने पर तीन महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास
इसके अलावा परीक्षा अधिनियम की संबंधित धारा में भी 2 साल के सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं विपिन कुमार को भी साजिश, धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम की संबंधित धाराओं में 2 और 3 साल के सश्रम कारावास की सजा मिली है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों पर प्रत्येक संबंधित अपराध में 1-1 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर 3 महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई मूल सजाएं एक साथ चलेंगी। आपको बता दे कि पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 से जुड़ा यह मामला 2014 में सामने आया था और करीब 12 साल बाद अब ग्वालियर की विशेष CBI अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।
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