इदरीश मोहम्मद, पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में बड़ी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हो रहे ग्रामीणों का ‘चिता आंदोलन’ बुधवार को 12वें दिन और अधिक उग्र हो गया। चिता, मिट्टी, फांसी और जल सत्याग्रह के बाद अब प्रभावितों ने सूली सत्याग्रह की शुरुआत कर दी है। प्रशासन की निरंतर अनदेखी के चलते स्थानीय स्तर का यह आक्रोश अब सीधे केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारों में बदल चुका है, जहां आंदोलन स्थल पर “मोदी-मोहन होश में आओ” और “बिना मुआवजा दिए गांव डुबोना बंद करो” जैसे नारे गूंज रहे हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रुंझ और सिंगरौली-ललितपुर रेल लाइन सहित कई बड़ी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हो रहे ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 15 वर्षों से चल रही परियोजनाओं के बावजूद परिवारों का पुनर्वास और उचित मुआवजा अटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि “राज्य का अपने ही बनाए कानून का पालन न करना बेहद चिंताजनक है।”
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भटनागर ने प्रशासनिक रवैये पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “गांव, घर और जिंदगियां डूब रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की बेशर्मी तैर रही है।” प्रशासन की ओर से आंदोलन को दबाने के लिए भेजे जा रहे नोटिसों को उन्होंने लोकतंत्र का दमन बताया। विस्थापितों का आरोप है कि मुआवजे की सूचियों, पुनर्वास और संपत्तियों के मूल्यांकन में भारी गड़बड़ियां और लंबित मामले हैं, जबकि प्रशासन केवल कागजी दावों तक सीमित है। चिता से लेकर सूली तक के प्रतीकात्मक सत्याग्रहों के जरिए प्रभावित ग्रामीण स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक उन्हें उनका वैधानिक हक, सही मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल जाता, न्याय की यह लड़ाई जारी रहेगी।
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