ODISHA DESK, भुवनेश्वर: ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से दो बेहद महत्वपूर्ण न्यायिक आयोग की रिपोर्ट फाइल गायब होने के आरोपों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन द्वारा इस संवेदनशील जानकारी का खुलासा किए जाने के बाद सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल बीजद के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने साफ किया है कि इस गंभीर मामले में जो भी अधिकारी या व्यक्ति शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि इस संबंध में औपचारिक शिकायत मिलने पर सरकार पूरे मामले की सत्यता जांचने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश देगी।
बीजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री डॉ. अरुण कुमार साहू ने इन आरोपों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा; “क्या फाइलें सच में गायब हुई हैं या फिर किसी को बचाने के उद्देश्य से इन्हें जानबूझकर छुपाया गया है?” उन्होंने आगे कहा कि राज्य के सबसे सुरक्षित प्रशासनिक केंद्र में डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम होने के बावजूद फाइलों की हार्ड कॉपी का गायब हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच जमकर बयानबाजी हो रही है। विपक्षी दल बीजद का कहना है कि वर्तमान भाजपा सरकार अपनी विफलताओं और एएसओ मारपीट मामले जैसी महत्वपूर्ण रिपोर्टों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह ‘मिसिंग फाइल ड्रामा’ कर रही है। भाजपा विधायक लक्ष्मण बाग ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा है कि केवल अनुमान और अटकलों के आधार पर राजनीति करने के बजाय बीजद नेताओं को सबूतों के साथ पुलिस के पास जाना चाहिए।
वहीं, भाजपा विधायक प्रशांत जगदेव ने दावा किया है कि पिछली सरकार के समय में ही ये सारे घोटाले और अनियमितताएं हुई हैं, जिनका पर्दाफाश बहुत जल्द होने वाला है। इस हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम ने राज्य में सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा, गोपनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह है कि इस मामले की जांच के बाद क्या बड़े तथ्य सामने आते हैं।
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