श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से Vikram-1 रॉकेट ने 18 जुलाई, शनिवार को जैसे ही आसमान का सीना चीरते हुए अंतरिक्ष में कदम रखा, वैसे ही भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर ने एक नया इतिहास रच दिया. कई दशकों तक, भारत में स्पेस एक्सप्लोरेशन का काम सिर्फ सरकारी संस्था ISRO ही करती थी. लेकिन अब दो वैज्ञानिकों रिस्क लेकर भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान का इतिहास बदल दिया.

ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों पवन चंदाना और नागा भरत डाके ने स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना कर भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में क्रांति ला दी है.

पवन चंदाना और नागा भरत डाके ने विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग के साथ ही भारत को बड़ी कामयाबी दिलाई है. यह भारत का पहला ऐसा मौका था जब किसी प्राइवेट कंपनी से पूरी तरह तैयार हुआ रॉकेट अंतरिक्ष में सफल छलांग लगाई. कुछ साल पहले तक पवन ISRO में वैज्ञानिक के रूप में काम कर रहे थे. लेकिन आज, वह भारत के पहले सफल प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट मिशन के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे हैं.

भारत के पहले स्‍पेस यूनिकॉर्न की स्‍थापना पवन कुमार चंदाना ने अपने दोस्‍त नागा भारत डाका के साथ मिलकर 2018 में की थी. दो पूर्व ISRO वैज्ञानिकों ने की 8 साल की कड़ी मेहनत के बाद आज उनके ‘विक्रम-1’ ने भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट के रूप में इतिहास रच दिया.

कुछ साल पहले तक पवन ISRO में वैज्ञानिक के रूप में काम कर रहे थे. लेकिन आज, वह भारत के पहले सफल प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट मिशन के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे हैं.

आज भारत निजी क्षेत्र से ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया और इसके पीछे सबसे बड़ा चेहरा हैं- पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका.

अपने साथी इंजीनियर नागा भरत डाका के साथ मिलकर उन्होंने हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस नाम के स्टार्टअप की शुरुआत की. 6 साल तक इसरो में काम करते हुए उन्होंने भारत के कई बड़े स्पेस मिशनों को बेहद करीब से देखा. और अब विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग ने साबित कर दिया है कि भारत का प्राइवेट सेक्टर भी अंतरिक्ष में झंडे गाड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m