Automobile Desk – Tyre Replacement Safety Tips : भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग के दौरान टायर पंचर होना एक बेहद आम समस्या है. आजकल अधिकतर टू-व्हीलर्स और फोर-व्हीलर्स में ट्यूबलेस टायर्स आ रहे हैं, जिससे पंचर होने के तुरंत बाद गाड़ी का संतुलन नहीं बिगड़ता और हवा काफी धीरे-धीरे निकलती है. लेकिन कई बार लोग एक ही टायर को बार-बार पंचर बनवाकर चलाते रहते हैं. ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि आखिर एक टायर में कितने पंचर होने के बाद हादसे का खतरा बढ़ जाता है और किस स्थिति में इसे बदल देना ही समझदारी है.

आमतौर पर अगर टायर की मुख्य सतह, जिसे ‘ट्रेड’ कहा जाता है, उसमें 2 से 3 छोटे पंचर हों, तो उन्हें सही तरीके से रिपेयर कराकर चलाया जा सकता है. हालांकि, यदि किसी एक ही टायर में 4 या उससे ज्यादा पंचर हो चुके हैं, तो उसकी संरचनात्मक मजबूती काफी हद तक घट जाती है. हाई-स्पीड में गाड़ी चलाते वक्त या लंबी दूरी के सफर के दौरान ऐसे कमजोर टायर अचानक फट सकते हैं, जो किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है. इसलिए 3-4 बार से ज्यादा पंचर हो चुके टायर को तुरंत बदल देने की सलाह दी जाती है.
पंचर की संख्या के अलावा इस बात का ध्यान रखना भी बेहद अहम है कि छेद किस जगह पर हुआ है. अगर पंचर टायर के साइडवॉल (किनारे वाले हिस्से) पर हुआ है, तो उसे रिपेयर कराना बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जाता. साइडवॉल गाड़ी का वजन संभालती है और मोड़ों पर सबसे ज्यादा दबाव झेलती है. इस हिस्से में पैच या प्लग लगाने से टायर के ब्लास्ट होने की गुंजाइश बढ़ जाती है. Side wall में कोई भी कट या छेद होने पर बिना किसी देरी के नया टायर ही लगवाना चाहिए.
इसके साथ ही, दो पंचर के बीच की दूरी और छेद का साइज भी मायने रखता है. अगर दो पंचर एक-दूसरे के बेहद पास हुए हैं, तो उनके बीच का रबर ढीला पड़ जाता है. ऐसे में रिपेयरिंग के बाद भी वहां से हवा का रिसाव बना रहता है. 6 मिलीमीटर से बड़ा छेद होने पर भी सामान्य मशरूम पैच या प्लग काम नहीं आते और टायर की ग्रिप कमजोर होने लगती है.
सिर्फ पंचर ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य संकेत दिखने पर भी टायर को बदल देना चाहिए. अगर आपके वाहन के टायर का ट्रेड घिसकर बहुत समतल हो गया है, रबर में उभार या गहरी दरारें दिखने लगी हैं, या फिर बार-बार हवा कम हो रही है, तो रिपेयर कराने का कोई फायदा नहीं होता. पुराना और घिसा हुआ टायर बारिश के मौसम में फिसलन का कारण बनता है और ब्रेक लगाने पर गाड़ी रुकने में ज्यादा समय लेती है.
टायर की उम्र लंबी रखने और हादसों से बचने के लिए सही एयर प्रेशर बनाए रखना बहुत जरूरी है. हर 10-15 दिन में हवा का दबाव चेक करवाते रहें और नुकीली चीजों से बचकर गाड़ी चलाएं. पंचर होने पर किसी भी लोकल मैकेनिक से सस्ता काम कराने के बजाय सही और प्रोफेशनल तरीके से ही पंचर जुड़वाएं, ताकि आपकी और आपके वाहन की सुरक्षा बनी रहे.



